📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / सुबोध कुलकर्णी
सरकारी योजना
आरटीआई से पता चला: महाराष्ट्र ने लड़की बहिन योजना पर 9,605 करोड़ रुपये 9.2 मिलियन लाभार्थियों पर खर्च किए
✍️ livemint.com
🗓 22 अग. 2026, 02:34 PM
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एक आरटीआई आवेदन से पता चला कि महाराष्ट्र सरकार ने लड़की बहिन योजना के तहत लगभग 9.2 मिलियन अयोग्य व्यक्तियों को 9,605 करोड़ रुपये वितरित किए।
एक नागरिक समूह द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से पता चला है कि महाराष्ट्र सरकार ने लड़की बहिन योजना के तहत लगभग 9.2 मिलियन अयोग्य लाभार्थियों को 9,605 करोड़ रुपये वितरित किए। यह योजना लड़कियों की शिक्षा व कल्याण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, परन्तु पात्रता जाँच में कमी के कारण कई अनधिकृत व्यक्तियों को लाभ मिला।
आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी के अनुसार, धनराशि मुख्यतः राज्य के कल्याण विभागों और साझेदार बैंकों के माध्यम से वितरित की गई, परन्तु डेटा में लक्ष्य समूह और वास्तविक प्राप्तकर्ताओं के बीच बड़ी असमानता दिखती है। आय सीमा, आयु सीमा या आवश्यक दस्तावेजों की कमी के आधार पर 9.2 मिलियन नाम अयोग्य बताये गये हैं।
राज्य अधिकारियों ने अभी तक इस खुलासे पर कोई टिप्पणी नहीं की है, परन्तु इस तथ्य से योजना की निगरानी प्रणाली की पुनः समीक्षा की संभावना बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े लाभार्थी सत्यापन और समय‑समय पर ऑडिट जैसी उपायों से भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोका जा सकता है।
यह खुलासा भारत में बड़े सामाजिक योजनाओं में वित्तीय रिसाव की चिंताओं को और बढ़ा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।
आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी के अनुसार, धनराशि मुख्यतः राज्य के कल्याण विभागों और साझेदार बैंकों के माध्यम से वितरित की गई, परन्तु डेटा में लक्ष्य समूह और वास्तविक प्राप्तकर्ताओं के बीच बड़ी असमानता दिखती है। आय सीमा, आयु सीमा या आवश्यक दस्तावेजों की कमी के आधार पर 9.2 मिलियन नाम अयोग्य बताये गये हैं।
राज्य अधिकारियों ने अभी तक इस खुलासे पर कोई टिप्पणी नहीं की है, परन्तु इस तथ्य से योजना की निगरानी प्रणाली की पुनः समीक्षा की संभावना बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े लाभार्थी सत्यापन और समय‑समय पर ऑडिट जैसी उपायों से भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोका जा सकता है।
यह खुलासा भारत में बड़े सामाजिक योजनाओं में वित्तीय रिसाव की चिंताओं को और बढ़ा रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।