📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / LRBurdak
धर्म
राजा भोज की 1100 वर्ष पुरानी महाकाल की शाही सवारी परंपरा
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 06 सित. 2026, 07:51 PM
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महाकाल मंदिर में 11वीं शताब्दी से चल रही शाही सवारी परंपरा, जिसे राजा भोज ने आरम्भ किया, बाद में मुगल सम्राटों और सिंधिया वंश के राजाओं ने और भी भव्य बनाया।
महाकाल मंदिर में शाही सवारी की परंपरा 11वीं शताब्दी में राजा भोज के संरक्षण में शुरू हुई, जब उन्होंने देवता के लिए एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया।
इस परेड में कलाकारों और संगीतकारों की भागीदारी थी, और सदियों के दौरान इसमें मुगल सम्राट अकबर और उनके पुत्र जहांगीर जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने भी हिस्सा लिया।
बाद में सिंधिया वंश के राजाओं ने इस कार्यक्रम को और भी भव्य बनाया, विस्तृत सजावट जोड़कर इसे क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक आकर्षण बना दिया।
आज यह परंपरा जारी है, जो भक्ति और पर्यटकों को आकर्षित करती है और मध्य प्रदेश की जीवित विरासत के रूप में मानी जाती है।
महाकाल सवारी की 1100‑वर्षीय इतिहास इस मंदिर की भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक परिदृश्य में स्थायी महत्व को रेखांकित करता है।
इस परेड में कलाकारों और संगीतकारों की भागीदारी थी, और सदियों के दौरान इसमें मुगल सम्राट अकबर और उनके पुत्र जहांगीर जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने भी हिस्सा लिया।
बाद में सिंधिया वंश के राजाओं ने इस कार्यक्रम को और भी भव्य बनाया, विस्तृत सजावट जोड़कर इसे क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक आकर्षण बना दिया।
आज यह परंपरा जारी है, जो भक्ति और पर्यटकों को आकर्षित करती है और मध्य प्रदेश की जीवित विरासत के रूप में मानी जाती है।
महाकाल सवारी की 1100‑वर्षीय इतिहास इस मंदिर की भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक परिदृश्य में स्थायी महत्व को रेखांकित करता है।