📷 चित्र स्रोत: Flickr (CC)
स्वास्थ्य
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड में 8 महीने बाद खुलासा, कोर्ट में रिपोर्ट पेश
✍️ Amar Ujala · Indore
🗓 20 अग. 2026, 09:36 PM
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इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में कोर्ट को भेजी गई है, और अगले सुनवाई में इसे सार्वजनिक करने की संभावना है।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में जल‑गुणवत्ता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जब निवासियों ने बताया कि यहाँ के नल‑पानी में दूषित तत्व पाए गए, जिससे शहर भर में स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ बढ़ गईं। यह समस्या लगभग आठ महीने पहले उजागर हुई, जिसके बाद स्थानीय स्वास्थ्य और नगरपालिका अधिकारियों ने जांच शुरू की।
कोर्ट को दाखिल किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, जांच टीम ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उसे बंद लिफाफे में जिला कोर्ट को सौंपा है। लिफाफे के बंद रहने का अर्थ है कि इसकी सामग्री अभी तक जनता या मीडिया के सामने नहीं लाई गई है।
राज्य के कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि अगली सुनवाई में इस लिफाफे को खोलने की संभावना है, जिससे न्यायालय और जनता को साक्ष्य देखने को मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यदि रिपोर्ट में दोषी पाए गए तो जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और निवासियों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने त्वरित सुधारात्मक कदमों की मांग की है, यह कहते हुए कि पुष्टि होने पर दूषित पानी का दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव पड़ सकता है। आगामी न्यायिक निर्णय को स्थानीय नागरिक और नीति निर्माताओं दोनों ने बारीकी से देखा है।
कोर्ट को दाखिल किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार, जांच टीम ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उसे बंद लिफाफे में जिला कोर्ट को सौंपा है। लिफाफे के बंद रहने का अर्थ है कि इसकी सामग्री अभी तक जनता या मीडिया के सामने नहीं लाई गई है।
राज्य के कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि अगली सुनवाई में इस लिफाफे को खोलने की संभावना है, जिससे न्यायालय और जनता को साक्ष्य देखने को मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यदि रिपोर्ट में दोषी पाए गए तो जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और निवासियों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएंगे।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने त्वरित सुधारात्मक कदमों की मांग की है, यह कहते हुए कि पुष्टि होने पर दूषित पानी का दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव पड़ सकता है। आगामी न्यायिक निर्णय को स्थानीय नागरिक और नीति निर्माताओं दोनों ने बारीकी से देखा है।