**“डूसू का रण तैयार: फाइनल पैनल घोषित, अब छात्र वोटों पर सियासी दंगल!”**
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डूसू का रण तैयार: फाइनल पैनल घोषित, अब वोटों की जंग!
ABVP बनाम NSUI की सीधी टक्कर के बीच AISA-SFI गठबंधन ने भी ठोकी ताल—18 सितंबर को छात्रों का फैसला
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 की तस्वीर अब लगभग पूरी तरह साफ हो गई है। नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद फाइनल पैनल सामने आते ही डीयू कैंपस में छात्र राजनीति का तापमान तेजी से बढ़ गया है। चार प्रमुख पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5 और सचिव तथा संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
अध्यक्ष पद बना सबसे बड़ा अखाड़ा
अध्यक्ष पद की लड़ाई पर सबसे ज्यादा नजर है। ABVP के यश डबास, NSUI के विजय शंकर मीणा और AISA-SFI गठबंधन की अनन्या रतूड़ी समेत सात उम्मीदवार मैदान में हैं। यानी मुकाबला सिर्फ दो संगठनों के बीच सीमित नहीं है, लेकिन चुनावी तस्वीर में ABVP और NSUI की भिड़ंत सबसे प्रमुख दिखाई दे रही है।
ABVP का पैनल
ABVP ने अध्यक्ष पद पर यश डबास, उपाध्यक्ष पद पर इशू मौर्य, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह को मैदान में उतारा है। संगठन के पैनल में खेल और छात्र राजनीति से जुड़े चेहरे शामिल हैं। यश डबास अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी रहे हैं, जबकि लक्ष्यराज सिंह हैंडबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
NSUI ने भी खोला मोर्चा
NSUI ने अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा, उपाध्यक्ष पद के लिए वीर छत्रथ, सचिव पद के लिए नम्रता चौधरी और संयुक्त सचिव पद के लिए गोपाल चौधरी को अपना पैनल बनाया है। संगठन ने अभियान में छात्र हित, सुरक्षित कैंपस और बेहतर सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
AISA-SFI गठबंधन की अलग चुनौती
वामपंथी छात्र संगठनों के AISA-SFI गठबंधन ने अध्यक्ष पद पर अनन्या रतूड़ी को उतारा है। गठबंधन के पैनल में उपाध्यक्ष पद पर अक्षत शिखर, सचिव पद पर स्टैनजिन डेस्क्योंग और संयुक्त सचिव पद पर बी. पारिजात शामिल हैं। गठबंधन ने वैकल्पिक छात्र राजनीति और जवाबदेही जैसे मुद्दों को सामने रखा है।
अब असली सवाल—किसके साथ जाएगा छात्र वोट?
फाइनल पैनल सामने आने के बाद अब चुनाव प्रचार निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और आवास, कैंपस सुविधाएं, शिक्षा और छात्र कल्याण जैसे मुद्दे इस बार चुनावी बहस के केंद्र में हैं।
18 सितंबर को मतदान और 19 सितंबर को मतगणना के साथ साफ होगा कि डीयू के छात्रों ने किस संगठन और किस चेहरे पर भरोसा जताया। फिलहाल कैंपस में सवाल एक ही—क्या ABVP अपना दबदबा कायम रखेगी, NSUI वापसी करेगी या AISA-SFI गठबंधन मुकाबले का समीकरण बदल देगा?
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 की तस्वीर अब लगभग पूरी तरह साफ हो गई है। नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद फाइनल पैनल सामने आते ही डीयू कैंपस में छात्र राजनीति का तापमान तेजी से बढ़ गया है। चार प्रमुख पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। अध्यक्ष पद के लिए 7, उपाध्यक्ष के लिए 5 और सचिव तथा संयुक्त सचिव पद के लिए 4-4 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।
अध्यक्ष पद बना सबसे बड़ा अखाड़ा
अध्यक्ष पद की लड़ाई पर सबसे ज्यादा नजर है। ABVP के यश डबास, NSUI के विजय शंकर मीणा और AISA-SFI गठबंधन की अनन्या रतूड़ी समेत सात उम्मीदवार मैदान में हैं। यानी मुकाबला सिर्फ दो संगठनों के बीच सीमित नहीं है, लेकिन चुनावी तस्वीर में ABVP और NSUI की भिड़ंत सबसे प्रमुख दिखाई दे रही है।
ABVP का पैनल
ABVP ने अध्यक्ष पद पर यश डबास, उपाध्यक्ष पद पर इशू मौर्य, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्यराज सिंह को मैदान में उतारा है। संगठन के पैनल में खेल और छात्र राजनीति से जुड़े चेहरे शामिल हैं। यश डबास अंतरराष्ट्रीय स्तर के टेनिस खिलाड़ी रहे हैं, जबकि लक्ष्यराज सिंह हैंडबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
NSUI ने भी खोला मोर्चा
NSUI ने अध्यक्ष पद के लिए विजय शंकर मीणा, उपाध्यक्ष पद के लिए वीर छत्रथ, सचिव पद के लिए नम्रता चौधरी और संयुक्त सचिव पद के लिए गोपाल चौधरी को अपना पैनल बनाया है। संगठन ने अभियान में छात्र हित, सुरक्षित कैंपस और बेहतर सुविधाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया है।
AISA-SFI गठबंधन की अलग चुनौती
वामपंथी छात्र संगठनों के AISA-SFI गठबंधन ने अध्यक्ष पद पर अनन्या रतूड़ी को उतारा है। गठबंधन के पैनल में उपाध्यक्ष पद पर अक्षत शिखर, सचिव पद पर स्टैनजिन डेस्क्योंग और संयुक्त सचिव पद पर बी. पारिजात शामिल हैं। गठबंधन ने वैकल्पिक छात्र राजनीति और जवाबदेही जैसे मुद्दों को सामने रखा है।
अब असली सवाल—किसके साथ जाएगा छात्र वोट?
फाइनल पैनल सामने आने के बाद अब चुनाव प्रचार निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। छात्र सुरक्षा, हॉस्टल और आवास, कैंपस सुविधाएं, शिक्षा और छात्र कल्याण जैसे मुद्दे इस बार चुनावी बहस के केंद्र में हैं।
18 सितंबर को मतदान और 19 सितंबर को मतगणना के साथ साफ होगा कि डीयू के छात्रों ने किस संगठन और किस चेहरे पर भरोसा जताया। फिलहाल कैंपस में सवाल एक ही—क्या ABVP अपना दबदबा कायम रखेगी, NSUI वापसी करेगी या AISA-SFI गठबंधन मुकाबले का समीकरण बदल देगा?