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बिहार ने 2026 में भूमि सर्वे शुरू किया, रिकॉर्ड अपडेट कर संपत्ति विवाद सुलझाएगा
✍️ Realty Plus Magazine
🗓 22 अग. 2026, 03:03 PM
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बिहार सरकार ने 2026 के लिए व्यापक भूमि सर्वे शुरू किया है, जिससे अद्यतन भू-रिकॉर्ड बनेंगे और राज्य में चल रहे संपत्ति विवादों का समाधान होगा।
पटना, २२ अगस्त — बिहार सरकार ने 2026 के लिए एक व्यापक राज्यव्यापी भूमि सर्वेक्षण शुरू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य नवीनतम भू‑रिकॉर्ड और स्वामित्व मानचित्र तैयार करना है। इस सर्वे में सभी गाँव, कस्बे और शहरी क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा, और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए उपग्रह इमेजरी, जीपीएस तथा जियोस्पेशियल इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि तैयार किए गए डेटा को डिजिटल रूप में एक ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे भूमि मालिक, बैंक और न्यायालय जल्दी से शीर्षक सत्यापित कर सकेंगे। एक ही आधिकारिक स्रोत के माध्यम से संपत्ति विवादों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है, जो वर्तमान में न्यायिक प्रणाली को जाम कर रहे हैं।
रियल्टी प्लस मैगज़ीन ने इस पहल को रिपोर्ट किया है, जिसे राज्य में भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया गया है। फील्ड सत्यापन और डेटा समेकन के लिए कई महीने निर्धारित किए गए हैं, जिसके बाद नए रिकॉर्ड संबंधित पक्षों को जारी किए जाएंगे।
रियल एस्टेट डेवलपर्स और कृषि समुदाय सहित हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इससे भूमि लेन‑देन में भरोसा बढ़ेगा और मुकदमेबाजी के खर्च में कमी आएगी। सरकार ने प्रगति पर नियमित अपडेट देने और नागरिकों से सर्वे टीमों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है।
अधिकारियों ने बताया कि तैयार किए गए डेटा को डिजिटल रूप में एक ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे भूमि मालिक, बैंक और न्यायालय जल्दी से शीर्षक सत्यापित कर सकेंगे। एक ही आधिकारिक स्रोत के माध्यम से संपत्ति विवादों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है, जो वर्तमान में न्यायिक प्रणाली को जाम कर रहे हैं।
रियल्टी प्लस मैगज़ीन ने इस पहल को रिपोर्ट किया है, जिसे राज्य में भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया गया है। फील्ड सत्यापन और डेटा समेकन के लिए कई महीने निर्धारित किए गए हैं, जिसके बाद नए रिकॉर्ड संबंधित पक्षों को जारी किए जाएंगे।
रियल एस्टेट डेवलपर्स और कृषि समुदाय सहित हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इससे भूमि लेन‑देन में भरोसा बढ़ेगा और मुकदमेबाजी के खर्च में कमी आएगी। सरकार ने प्रगति पर नियमित अपडेट देने और नागरिकों से सर्वे टीमों के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है।