जिला मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय की जर्जर हालत अब गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
Watch on:
▶️ YouTube
जर्जर तहसील कार्यालय में खतरे के बीच काम, तहसीलदार की टेबल पर गिर रहे छत के टुकड़े,फोटो सोशल मीडिया पर वायरल
कोरबा : जिला मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय की जर्जर हालत अब गंभीर चिंता का विषय बन गई है। कार्यालय की छत इस कदर कमजोर हो चुकी है कि उसके टुकड़े टूटकर तहसीलदार की टेबल के ऊपर गिर रहे हैं। इससे कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने के साथ ही यहां आने वाले आम नागरिकों और अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। तहसील कार्यालय की स्थिति को दर्शाने वाली तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। तस्वीरों में कार्यालय की जर्जर छत और उससे टूटकर गिरते मलबे की स्थिति साफ नजर आ रही है। सवाल यह है कि जब जिम्मेदार अधिकारी के बैठने की जगह ही सुरक्षित नहीं है, तो रोजाना अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? तहसील न्यायालय में भी बदहाल व्यवस्था
तहसील न्यायालय की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। बारिश के दौरान कहीं छत से पानी टपकता है तो कहीं पानी रोकने के लिए पन्नी लगाकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे माहौल में न्यायिक कार्यों का संचालन होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सरकारी कार्यालयों की हालत पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरबा के कई सरकारी कार्यालयों में भवनों की हालत लंबे समय से खराब है। जर्जर छत, सीलन और बारिश के दौरान पानी टपकने जैसी समस्याओं के बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई जा रही है। ऐसे में किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल निरीक्षण कराकर जर्जर भवनों की मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। अब सवाल यही है कि आखिर कब तक जर्जर भवनों और अस्थायी इंतजामों के भरोसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय और न्यायालय संचालित होते रहेंगे?
तहसील न्यायालय की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। बारिश के दौरान कहीं छत से पानी टपकता है तो कहीं पानी रोकने के लिए पन्नी लगाकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे माहौल में न्यायिक कार्यों का संचालन होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सरकारी कार्यालयों की हालत पर भी उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरबा के कई सरकारी कार्यालयों में भवनों की हालत लंबे समय से खराब है। जर्जर छत, सीलन और बारिश के दौरान पानी टपकने जैसी समस्याओं के बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई जा रही है। ऐसे में किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को तत्काल निरीक्षण कराकर जर्जर भवनों की मरम्मत अथवा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। अब सवाल यही है कि आखिर कब तक जर्जर भवनों और अस्थायी इंतजामों के भरोसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय और न्यायालय संचालित होते रहेंगे?