आज सुबह हथियाही–चकरधे गाँव में लोगों की आँखें खुलीं तो चारों तरफ एक ही चर्चा थी—धनविन नदी का पानी लगातार बढ़ रहा था।
आज सुबह हथियाही–चकरधे गाँव में लोगों की आँखें खुलीं तो चारों तरफ एक ही चर्चा थी—धनविन नदी का पानी लगातार बढ़ रहा था।
🌊 धनविन नदी का बढ़ता पानी — हथियाही चकरधे की कहानी
आज सुबह हथियाही–चकरधे गाँव में लोगों की आँखें खुलीं तो चारों तरफ एक ही चर्चा थी—धनविन नदी का पानी लगातार बढ़ रहा था।
नदी का पानी धीरे-धीरे खेतों की ओर बढ़ने लगा था। गाँव के बुजुर्ग नदी के किनारे खड़े होकर पानी का बहाव देख रहे थे। किसी के चेहरे पर चिंता थी, तो कोई अपने घर और पशुओं की सुरक्षा की तैयारी कर रहा था।
गाँव के बच्चे दूर से नदी का बढ़ता पानी देखकर हैरान थे। महिलाएँ घर का जरूरी सामान सुरक्षित जगह पर रखने लगीं। वहीं कुछ युवा लोगों की मदद के लिए आगे आए और बुजुर्गों तथा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने लगे।
एक बुजुर्ग ने नदी की तरफ देखते हुए कहा—
“नदी हमारी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन जब इसका पानी बढ़ता है तो पूरा गाँव एक परिवार बन जाता है।”
शाम होते-होते पानी और बढ़ गया। लेकिन हथियाही–चकरधे के लोगों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। किसी ने नाव की व्यवस्था की, किसी ने खाने-पीने का सामान जुटाया और किसी ने लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी।
उस रात गाँव में डर जरूर था, लेकिन उससे ज्यादा एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की हिम्मत थी।
धनविन नदी का पानी चाहे जितना बढ़े, हथियाही–चकरधे के लोगों का हौसला उससे भी ऊँचा है। ❤️🙏
यह कहानी हमारे गाँव के उन सभी लोगों को समर्पित है, जो मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देते हैं।
आज सुबह हथियाही–चकरधे गाँव में लोगों की आँखें खुलीं तो चारों तरफ एक ही चर्चा थी—धनविन नदी का पानी लगातार बढ़ रहा था।
नदी का पानी धीरे-धीरे खेतों की ओर बढ़ने लगा था। गाँव के बुजुर्ग नदी के किनारे खड़े होकर पानी का बहाव देख रहे थे। किसी के चेहरे पर चिंता थी, तो कोई अपने घर और पशुओं की सुरक्षा की तैयारी कर रहा था।
गाँव के बच्चे दूर से नदी का बढ़ता पानी देखकर हैरान थे। महिलाएँ घर का जरूरी सामान सुरक्षित जगह पर रखने लगीं। वहीं कुछ युवा लोगों की मदद के लिए आगे आए और बुजुर्गों तथा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने लगे।
एक बुजुर्ग ने नदी की तरफ देखते हुए कहा—
“नदी हमारी जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन जब इसका पानी बढ़ता है तो पूरा गाँव एक परिवार बन जाता है।”
शाम होते-होते पानी और बढ़ गया। लेकिन हथियाही–चकरधे के लोगों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। किसी ने नाव की व्यवस्था की, किसी ने खाने-पीने का सामान जुटाया और किसी ने लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी।
उस रात गाँव में डर जरूर था, लेकिन उससे ज्यादा एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की हिम्मत थी।
धनविन नदी का पानी चाहे जितना बढ़े, हथियाही–चकरधे के लोगों का हौसला उससे भी ऊँचा है। ❤️🙏
यह कहानी हमारे गाँव के उन सभी लोगों को समर्पित है, जो मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देते हैं।