📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Sachinghai09
Derivative work: Radomian
बिज़नेस
उत्तर प्रदेश के 973 मेट्रिक टन के कैप्टिव कोयला ब्लॉक का 11 साल बाद भी निष्क्रिय रहना
✍️ Business Standard
🗓 18 सित. 2026, 05:01 AM
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश को आवंटित 973 मेट्रिक टन के कैप्टिव कोयला ब्लॉक को 11 साल बीतने के बाद भी उपयोग नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार को एक दशक से अधिक समय पहले 973 मिलियन टन अनुमानित कोयला भंडार वाला कैप्टिव कोयला ब्लॉक आवंटित किया गया था। यह ब्लॉक राज्य‑स्वामित्व वाले विद्युत संयंत्रों के लिए कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु निर्धारित था।
राज्य प्रशासन के हालिया बयान के अनुसार, 11 साल बीतने के बाद भी इस ब्लॉक पर कोई खनन कार्य नहीं शुरू हुआ है और यह पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। अब तक कोई उत्पादन आंकड़ा नहीं दिया गया और साइट को उत्खनन के लिए विकसित नहीं किया गया।
इतनी देर तक निष्क्रिय रहने से राज्य के लिए अवसर लागत का सवाल उठता है, विशेषकर जब विश्वसनीय बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों ने ब्लॉक की स्थिति की पुनः समीक्षा करने और इसे सक्रिय करने के संभावित कदमों पर विचार करने का संकेत दिया है, पर अभी तक कोई ठोस समय‑सीमा नहीं बताई गई।
यदि यह ब्लॉक सक्रिय हो जाता है, तो यह आयातित कोयले पर निर्भरता कम कर सकता है और स्थानीय उद्योगों को समर्थन दे सकता है। लेकिन खनन शुरू होने तक यह संसाधन राज्य की संपत्ति सूची में निष्क्रिय ही रहेगा।
राज्य प्रशासन के हालिया बयान के अनुसार, 11 साल बीतने के बाद भी इस ब्लॉक पर कोई खनन कार्य नहीं शुरू हुआ है और यह पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। अब तक कोई उत्पादन आंकड़ा नहीं दिया गया और साइट को उत्खनन के लिए विकसित नहीं किया गया।
इतनी देर तक निष्क्रिय रहने से राज्य के लिए अवसर लागत का सवाल उठता है, विशेषकर जब विश्वसनीय बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों ने ब्लॉक की स्थिति की पुनः समीक्षा करने और इसे सक्रिय करने के संभावित कदमों पर विचार करने का संकेत दिया है, पर अभी तक कोई ठोस समय‑सीमा नहीं बताई गई।
यदि यह ब्लॉक सक्रिय हो जाता है, तो यह आयातित कोयले पर निर्भरता कम कर सकता है और स्थानीय उद्योगों को समर्थन दे सकता है। लेकिन खनन शुरू होने तक यह संसाधन राज्य की संपत्ति सूची में निष्क्रिय ही रहेगा।