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मनोरंजन
प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के लंबे OTT विंडो के समर्थन से सितंबर में नई तमिल फ़िल्में नहीं
✍️ zoomtventertainment.com
🗓 23 अग. 2026, 06:39 PM
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तमिल फ़िल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने कहा कि लंबी OTT विंडो की माँग के कारण सितंबर में कोई नई फ़िल्में थिएटर में नहीं आएँगी।
तमिल फ़िल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (TFPA) ने आधिकारिक नोटिस जारी कर बताया कि सितंबर 2024 में कोई नई तमिल फ़िल्में थिएटर में नहीं रिलीज़ होंगी। यह निर्णय फ़िल्म के थिएटर रिलीज़ और OTT प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्धता के बीच की अवधि को बढ़ाने की मांग के कारण लिया गया है, जिससे बॉक्स‑ऑफ़िस राजस्व की सुरक्षा हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तमिलनाडु के सिनेमा मालिकों, विशेषकर चेन्नई में, अस्थायी रूप से मंदी ला सकता है, जहाँ अधिकांश रिलीज़ होते हैं। वितरकों और प्रदर्शकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि नई फ़िल्मों की अनुपस्थिति दर्शकों की संख्या और आय को प्रभावित कर सकती है, इसलिए वे संभावित मुआवजा उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।
लंबी OTT विंडो की मांग भारतीय सिनेमा में चल रहे व्यापक बहस को दर्शाती है, जहाँ प्रोड्यूसर्स उत्पादन लागत को पूरा करने के लिए डिजिटल स्ट्रीमिंग डील्स पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। पहले तमिल फ़िल्में 30‑दिन की थिएटर एक्सक्लूसिविटी के बाद OTT पर आती थीं; अब TFPA 60‑दिन की अवधि की वकालत कर रहा है।
एसोसिएशन के इस कदम को कई बड़े स्टूडियो ने समर्थन दिया है, परन्तु कुछ स्वतंत्र फ़िल्म निर्माताओं को डर है कि डिजिटल रिलीज़ में देरी से उनका व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचना कठिन हो जाएगा। वार्ता जारी है और स्थिति के विकास की प्रतीक्षा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम तमिलनाडु के सिनेमा मालिकों, विशेषकर चेन्नई में, अस्थायी रूप से मंदी ला सकता है, जहाँ अधिकांश रिलीज़ होते हैं। वितरकों और प्रदर्शकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि नई फ़िल्मों की अनुपस्थिति दर्शकों की संख्या और आय को प्रभावित कर सकती है, इसलिए वे संभावित मुआवजा उपायों पर चर्चा कर रहे हैं।
लंबी OTT विंडो की मांग भारतीय सिनेमा में चल रहे व्यापक बहस को दर्शाती है, जहाँ प्रोड्यूसर्स उत्पादन लागत को पूरा करने के लिए डिजिटल स्ट्रीमिंग डील्स पर अधिक निर्भर हो रहे हैं। पहले तमिल फ़िल्में 30‑दिन की थिएटर एक्सक्लूसिविटी के बाद OTT पर आती थीं; अब TFPA 60‑दिन की अवधि की वकालत कर रहा है।
एसोसिएशन के इस कदम को कई बड़े स्टूडियो ने समर्थन दिया है, परन्तु कुछ स्वतंत्र फ़िल्म निर्माताओं को डर है कि डिजिटल रिलीज़ में देरी से उनका व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचना कठिन हो जाएगा। वार्ता जारी है और स्थिति के विकास की प्रतीक्षा है।