📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
देश
सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में वाणिज्यिक गतिविधियों पर रोक, सीलिंग में लापरवाही पर चेतावनी
✍️ Bhaskar English
🗓 23 सित. 2026, 06:32 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवासीय मोहल्लों में कोई भी वाणिज्यिक कारोबार नहीं चलाया जा सकता और सीलिंग आदेशों के सख्त पालन की चेतावनी दी।
नई दिल्ली, 23 सितंबर — सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय क्षेत्रों में वाणिज्यिक इकाइयों की अनुमति न देने का स्पष्ट आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि शॉप, ऑफिस या किसी भी प्रकार के लाभ‑उत्पादक कार्यों को रहने वाले मोहल्लों में स्थापित करना शहरी योजना और नागरिकों के जीवन स्तर को नुकसान पहुँचाता है।
साथ ही, कोर्ट ने नगर और राज्य स्तर पर अवैध वाणिज्यिक उपयोग को रोकने के लिए जारी सीलिंग आदेशों के कार्यान्वयन में लापरवाही की ओर गंभीर चेतावनी दी। उल्लंघन करने वाले मालिकों और निष्क्रिय अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और दंड का आदेश दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय शहरों में भीड़भाड़ कम करने और आवासीय माहौल बनाए रखने के पिछले निर्देशों को सुदृढ़ करता है। अब प्रमुख शहरों में इस दिशा में व्यापक जांच की संभावना है, जहाँ मिश्रित उपयोग के कई मामलों की रिपोर्टें मिली हैं।
कोर्ट ने अनुपालन के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई, पर स्थानीय निकायों को नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, केंद्रीय सरकार को आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के माध्यम से निगरानी रखने का आदेश दिया गया।
संपत्ति मालिकों और वाणिज्यिक किरायेदारों को सलाह दी गई है कि वे कानूनी परिणामों से बचने हेतु अनुमत गतिविधियों के बारे में स्पष्टता प्राप्त करें।
साथ ही, कोर्ट ने नगर और राज्य स्तर पर अवैध वाणिज्यिक उपयोग को रोकने के लिए जारी सीलिंग आदेशों के कार्यान्वयन में लापरवाही की ओर गंभीर चेतावनी दी। उल्लंघन करने वाले मालिकों और निष्क्रिय अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और दंड का आदेश दिया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय शहरों में भीड़भाड़ कम करने और आवासीय माहौल बनाए रखने के पिछले निर्देशों को सुदृढ़ करता है। अब प्रमुख शहरों में इस दिशा में व्यापक जांच की संभावना है, जहाँ मिश्रित उपयोग के कई मामलों की रिपोर्टें मिली हैं।
कोर्ट ने अनुपालन के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं बताई, पर स्थानीय निकायों को नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, केंद्रीय सरकार को आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के माध्यम से निगरानी रखने का आदेश दिया गया।
संपत्ति मालिकों और वाणिज्यिक किरायेदारों को सलाह दी गई है कि वे कानूनी परिणामों से बचने हेतु अनुमत गतिविधियों के बारे में स्पष्टता प्राप्त करें।