📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Letartean
स्थानीय
राखी बोरवेल में फंसे मासूम भोमाराम को बचाने के लिए 22 घंटे का संघर्ष, राजस्थान
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 16 अक्टू. 2026, 06:01 PM
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22 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी राजस्थान के पूनिया ढाणी में बोरवेल में फंसे मासूम भोमाराम को बचाने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित कई टीमों ने बचाव कार्य जारी रखा है, जबकि परिजन और गाँव वाले उसकी सुरक्षित निकासी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मासूम भोमाराम, एक छोटा बच्चा, राजस्थान के बोरवेल के पूनिया ढाणी में 22 घंटे से अधिक समय पहले गहरी बोरवेल में गिर गया। स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत घटना की सूचना दी, जिससे कई बचाव इकाइयों को त्वरित रूप से तैनात किया गया।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और अन्य विशेषज्ञ टीमों ने मिलकर एक व्यापक बचाव अभियान चलाया है। उन्होंने ड्रिलिंग रिग, ऑक्सीजन सप्लाई लाइन और बचाव जाल स्थापित किया है, जिससे बच्चे तक पहुँचने के लिए कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया जा रहा है।
परिवार के सदस्य और आसपास के गाँव वाले साइट पर इकट्ठा होकर प्रार्थना और समर्थन कर रहे हैं, जबकि बचाव कार्य की प्रगति को बारीकी से देख रहे हैं। अधिकारियों ने धैर्य रखने की अपील की है, क्योंकि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वे सावधानीपूर्वक निकासी प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं।
ताज़ा जानकारी के अनुसार, बचाव दल अभी भी स्थल पर मौजूद है और एक समन्वित, “युद्धस्तर” जैसी रणनीति अपनाते हुए मासूम को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। समुदाय आशा कर रहा है कि आने वाले घंटों में सकारात्मक परिणाम मिलेगा।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और अन्य विशेषज्ञ टीमों ने मिलकर एक व्यापक बचाव अभियान चलाया है। उन्होंने ड्रिलिंग रिग, ऑक्सीजन सप्लाई लाइन और बचाव जाल स्थापित किया है, जिससे बच्चे तक पहुँचने के लिए कठिन परिस्थितियों में लगातार काम किया जा रहा है।
परिवार के सदस्य और आसपास के गाँव वाले साइट पर इकट्ठा होकर प्रार्थना और समर्थन कर रहे हैं, जबकि बचाव कार्य की प्रगति को बारीकी से देख रहे हैं। अधिकारियों ने धैर्य रखने की अपील की है, क्योंकि सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वे सावधानीपूर्वक निकासी प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं।
ताज़ा जानकारी के अनुसार, बचाव दल अभी भी स्थल पर मौजूद है और एक समन्वित, “युद्धस्तर” जैसी रणनीति अपनाते हुए मासूम को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। समुदाय आशा कर रहा है कि आने वाले घंटों में सकारात्मक परिणाम मिलेगा।