📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Kaushal Bishnoi
अपराध
राजस्थान सरकार ने आरएएस अधिकारी पर जाति‑आधारित पोस्टों के लिए चार्जशीट दायर की
✍️ The Hawk
🗓 30 अक्टू. 2026, 03:46 AM
👁 15
राजस्थान प्रशासन ने एक आरएएस अधिकारी को जाति‑आधारित साम्प्रदायिक सामग्री पोस्ट करने के आरोप में आधिकारिक चार्जशीट दायर की है।
राजस्थान सरकार ने एक आरएएस अधिकारी के खिलाफ जाति‑आधारित साम्प्रदायिक सामग्री को सार्वजनिक मंचों पर पोस्ट करने के आरोप में आधिकारिक चार्जशीट दायर की है। इस चार्जशीट में राज्य के विरोध‑भेदभाव और साम्प्रदायिक सद्भावना कानूनों के उल्लंघन का उल्लेख है, यह कहा गया है कि ऐसे पोस्ट सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।
जमा किए गए प्रमाणों के अनुसार, अधिकारी ने आधिकारिक और निजी दोनों सोशल मीडिया खातों से विशिष्ट जाति समूहों को लक्षित करने वाली सामग्री साझा की, जिससे सामुदायिक नेताओं और नागरिक संगठनों से शिकायतें आईं। राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि ये पोस्ट साम्प्रदायिक शांति को बनाए रखने वाले कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं।
चार्जशीट में अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसमें सेवा से निलंबन शामिल है, और आगे की अभियोजन के लिए मामले को उपयुक्त न्यायिक प्राधिकरण को भेजने का प्रस्ताव है। अधिकारी को निर्धारित कानूनी समय सीमा के भीतर इन आरोपों का जवाब देने का अवसर दिया गया है।
राज्य के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम सार्वजनिक सेवकों के व्यवहार में शून्य‑सहिष्णुता की नीति को दर्शाता है, विशेषकर जब वे सामाजिक सद्भावना को बनाए रखने की जिम्मेदारी रखते हैं।
यह मामला सार्वजनिक अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर बढ़ती निगरानी को उजागर करता है, जिससे आधिकारिक संवाद में नैतिक मानकों का पालन आवश्यक हो गया है।
जमा किए गए प्रमाणों के अनुसार, अधिकारी ने आधिकारिक और निजी दोनों सोशल मीडिया खातों से विशिष्ट जाति समूहों को लक्षित करने वाली सामग्री साझा की, जिससे सामुदायिक नेताओं और नागरिक संगठनों से शिकायतें आईं। राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि ये पोस्ट साम्प्रदायिक शांति को बनाए रखने वाले कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं।
चार्जशीट में अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिसमें सेवा से निलंबन शामिल है, और आगे की अभियोजन के लिए मामले को उपयुक्त न्यायिक प्राधिकरण को भेजने का प्रस्ताव है। अधिकारी को निर्धारित कानूनी समय सीमा के भीतर इन आरोपों का जवाब देने का अवसर दिया गया है।
राज्य के अधिकारियों ने कहा कि यह कदम सार्वजनिक सेवकों के व्यवहार में शून्य‑सहिष्णुता की नीति को दर्शाता है, विशेषकर जब वे सामाजिक सद्भावना को बनाए रखने की जिम्मेदारी रखते हैं।
यह मामला सार्वजनिक अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर बढ़ती निगरानी को उजागर करता है, जिससे आधिकारिक संवाद में नैतिक मानकों का पालन आवश्यक हो गया है।