पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन संवत्सरी पर गूंजा क्षमायाचना का संदेश
जैन समाज ने मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए मांगी क्षमा, आपसी कड़वाहट भुलाकर प्रेम व सद्भाव का दिया संदेश
पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन संवत्सरी पर गूंजा क्षमायाचना का संदेश
जैन समाज ने मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए मांगी क्षमा, आपसी कड़वाहट भुलाकर प्रेम व सद्भाव का दिया संदेश
मनोहरथाना। जैन धर्म के पवित्र पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन श्वेतांबर जैन परंपरा के अनुसार संवत्सरी पर्व श्रद्धा और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर क्षमापना का महा-अनुष्ठान हुआ, जिसमें समाजजनों ने वर्षभर में जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी और दूसरों की गलतियों को भी हृदय से क्षमा करने का संकल्प लिया।
अमन जैन ने बताया कि संवत्सरी पर्व का मूल संदेश क्षमा मांगना और क्षमा करना है। इस दिन जैन समाज के लोग अपने परिवार, मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों से हाथ जोड़कर कहते हैं— “यदि मैंने जाने-अनजाने में मन, वचन या कर्म से आपका दिल दुखाया हो तो मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।” साथ ही सभी के प्रति मन में रखी नाराजगी और कड़वाहट को दूर कर रिश्तों में प्रेम, मधुरता और भाईचारे को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
जैन धर्म के मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्मः” को आत्मसात करते हुए इस अवसर पर केवल मनुष्यों से ही नहीं, बल्कि संसार के सभी छोटे-बड़े जीवों—पशु-पक्षियों, कीड़े-मकोड़ों सहित समस्त जीवों के प्रति जाने-अनजाने में हुई हिंसा के लिए भी क्षमा याचना की जाती है।
संवत्सरी पर्व लोगों को यह संदेश देता है कि वर्षभर के व्यवहार में यदि किसी प्रकार की कड़वाहट या मनमुटाव आया हो तो उसे भुलाकर क्षमा, करुणा, प्रेम और सद्भाव के साथ नए संबंधों की शुरुआत की जाए। यही इस महापर्व की वास्तविक भावना है।
श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर, मनोहरथाना
जैन समाज ने मन, वचन और कर्म से हुई भूलों के लिए मांगी क्षमा, आपसी कड़वाहट भुलाकर प्रेम व सद्भाव का दिया संदेश
मनोहरथाना। जैन धर्म के पवित्र पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन श्वेतांबर जैन परंपरा के अनुसार संवत्सरी पर्व श्रद्धा और आत्मचिंतन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर क्षमापना का महा-अनुष्ठान हुआ, जिसमें समाजजनों ने वर्षभर में जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी और दूसरों की गलतियों को भी हृदय से क्षमा करने का संकल्प लिया।
अमन जैन ने बताया कि संवत्सरी पर्व का मूल संदेश क्षमा मांगना और क्षमा करना है। इस दिन जैन समाज के लोग अपने परिवार, मित्रों, रिश्तेदारों और परिचितों से हाथ जोड़कर कहते हैं— “यदि मैंने जाने-अनजाने में मन, वचन या कर्म से आपका दिल दुखाया हो तो मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।” साथ ही सभी के प्रति मन में रखी नाराजगी और कड़वाहट को दूर कर रिश्तों में प्रेम, मधुरता और भाईचारे को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है।
जैन धर्म के मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्मः” को आत्मसात करते हुए इस अवसर पर केवल मनुष्यों से ही नहीं, बल्कि संसार के सभी छोटे-बड़े जीवों—पशु-पक्षियों, कीड़े-मकोड़ों सहित समस्त जीवों के प्रति जाने-अनजाने में हुई हिंसा के लिए भी क्षमा याचना की जाती है।
संवत्सरी पर्व लोगों को यह संदेश देता है कि वर्षभर के व्यवहार में यदि किसी प्रकार की कड़वाहट या मनमुटाव आया हो तो उसे भुलाकर क्षमा, करुणा, प्रेम और सद्भाव के साथ नए संबंधों की शुरुआत की जाए। यही इस महापर्व की वास्तविक भावना है।
श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर, मनोहरथाना