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नवादा: मां को मुखाग्नि देने से लेकर श्राद्ध तक, सबसे छोटी बेटी रिया ने निभाया पुत्र का फर्ज
नवादा जिले के राजपुर इंदौल गांव में छह बहनों में सबसे छोटी बेटी रिया राज चौधरी ने मां लीलावती देवी को मुखाग्नि दी और श्राद्धकर्म की जिम्मेदारी संभाली। सभी बहनों ने मिलकर मां की अर्थी को कंधा देकर समाज को भावुक कर दिया।
नवादा जिले के नेमदारगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत राजपुर इंदौल गांव में एक बेटी ने सामाजिक परंपराओं से आगे बढ़कर ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। मां के निधन के बाद छह बहनों में सबसे छोटी बेटी रिया राज चौधरी ने न केवल उन्हें मुखाग्नि दी, बल्कि अब पूरे विधि-विधान के साथ श्राद्धकर्म की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। इस दौरान सभी छह बेटियों ने मां की अर्थी को कंधा देकर समाज को भावुक कर देने वाला संदेश दिया।
जानकारी के अनुसार, गांव के समाजसेवी कृष्णदेव चौधरी की 56 वर्षीय पत्नी लीलावती देवी लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। उनका इलाज चेन्नई के वेल्लोर में चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
लीलावती देवी अपने पीछे पति कृष्णदेव चौधरी, छह पुत्रियों, दामाद और नाती-नातिनों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वह कुशल गृहिणी होने के साथ-साथ सरल, उदार और मिलनसार स्वभाव की महिला थीं। गांव के लोगों के साथ उनका व्यवहार हमेशा मधुर रहा। सुख-दुख में लोगों के साथ खड़ी रहने वाली लीलावती देवी के निधन से ग्रामीणों में गहरा दुख है।
मां के निधन के बाद परिवार की छहों बेटियों ने एकजुट होकर अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां निभाईं। सबसे छोटी बेटी रिया राज चौधरी ने मां को मुखाग्नि देकर पुत्र का फर्ज निभाया। अब वह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सिर पर उत्तरी धारण कर श्राद्धकर्म की रस्में पूरी कर रही हैं। वहीं, सभी छह बहनों ने मिलकर मां की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम विदाई दी।
बेटियों के इस साहस और समर्पण की गांव में खूब चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर वे हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ निभा सकती हैं। लीलावती देवी के निधन पर परिवार के सदस्य संजू चौधरी, इशू कुमार, सिमरन कुमारी, गीता कुमारी सहित अन्य लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है, जबकि ग्रामीणों और शुभचिंतकों का उनके आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने का सिलसिला जारी है।
जानकारी के अनुसार, गांव के समाजसेवी कृष्णदेव चौधरी की 56 वर्षीय पत्नी लीलावती देवी लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। उनका इलाज चेन्नई के वेल्लोर में चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई और बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार सहित पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
लीलावती देवी अपने पीछे पति कृष्णदेव चौधरी, छह पुत्रियों, दामाद और नाती-नातिनों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वह कुशल गृहिणी होने के साथ-साथ सरल, उदार और मिलनसार स्वभाव की महिला थीं। गांव के लोगों के साथ उनका व्यवहार हमेशा मधुर रहा। सुख-दुख में लोगों के साथ खड़ी रहने वाली लीलावती देवी के निधन से ग्रामीणों में गहरा दुख है।
मां के निधन के बाद परिवार की छहों बेटियों ने एकजुट होकर अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां निभाईं। सबसे छोटी बेटी रिया राज चौधरी ने मां को मुखाग्नि देकर पुत्र का फर्ज निभाया। अब वह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सिर पर उत्तरी धारण कर श्राद्धकर्म की रस्में पूरी कर रही हैं। वहीं, सभी छह बहनों ने मिलकर मां की अर्थी को कंधा दिया और अंतिम विदाई दी।
बेटियों के इस साहस और समर्पण की गांव में खूब चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर वे हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ निभा सकती हैं। लीलावती देवी के निधन पर परिवार के सदस्य संजू चौधरी, इशू कुमार, सिमरन कुमारी, गीता कुमारी सहित अन्य लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है, जबकि ग्रामीणों और शुभचिंतकों का उनके आवास पर शोक संवेदना व्यक्त करने का सिलसिला जारी है।