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20 सित. 2026
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एमपी हाई कोर्ट ने गर्भस्थ शल्यक्रिया से पहले की गर्भधारण के कारण बच्चे के लिये मुआवजा नहीं दिया
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Gyanendra_Singh_Chau…
स्वास्थ्य

एमपी हाई कोर्ट ने गर्भस्थ शल्यक्रिया से पहले की गर्भधारण के कारण बच्चे के लिये मुआवजा नहीं दिया

✍️ Live Law 🗓 20 सित. 2026, 07:31 PM 👁 13
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गर्भस्थ शल्यक्रिया से पहले ही गर्भधारण शुरू हुई थी, इसलिए बच्चे को मुआवजा नहीं दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महिला के गर्भस्थ शल्यक्रिया के बाद जन्मे बच्चे के लिये मुआवजे की याचिका को खारिज कर दिया, यह कहा कि गर्भधारण शल्यक्रिया से पहले ही शुरू हो चुका था। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मुआवजा केवल तभी दिया जा सकता है जब गर्भधारण शल्यक्रिया की त्रुटि या अवैध प्रक्रिया के कारण हो।

सरकारी परिवार नियोजन योजना के तहत शल्यक्रिया करवाने वाली माँ ने दावा किया था कि बच्चे को मौजूदा कानून के तहत मुआवजा मिलना चाहिए। मेडिकल रिकॉर्ड की जांच के बाद कोर्ट ने पाया कि गर्भावस्था शल्यक्रिया से पहले ही स्थापित थी, इसलिए याचिका अस्वीकार की गई।

समयक्रम को महत्व देते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी शल्यक्रिया‑पश्चात जन्मों को स्वचालित मुआवजा नहीं दिया जा सकता। यह निर्णय भविष्य में समान मामलों में साक्ष्य‑आधारित जांच की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मौजूदा न्यायिक प्रवृत्ति के अनुरूप है, जिसमें मुआवजा केवल प्रक्रिया में लापरवाही या सहमति के उल्लंघन के मामलों में ही दिया जाता है। यह निर्णय राज्य भर में परिवार नियोजन विभाग के भविष्य के मामलों को प्रभावित कर सकता है।
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