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25 अग. 2026
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महाराष्ट्र में नई धर्मपरिवर्तन कानून से पहले चर्चों ने ‘फ्री विल’ फॉर्म जारी किए
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Priyankanagarajan
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महाराष्ट्र में नई धर्मपरिवर्तन कानून से पहले चर्चों ने ‘फ्री विल’ फॉर्म जारी किए

✍️ News18 🗓 25 अग. 2026, 08:38 PM 👁 4
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महाराष्ट्र में धर्मपरिवर्तन रोकने वाले कानून के लागू होने से पहले, कई चर्चों ने सदस्यों से ‘फ्री विल’ घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करवाए, ताकि स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन का प्रमाण मिल सके।

महाराष्ट्र सरकार ने एक नया धर्मपरिवर्तन विरोधी कानून लागू करने की तैयारी की है, जो जबरन धार्मिक परिवर्तन को आपराधिक बनाता है। इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप, राज्य के कई ईसाई चर्चों ने सदस्यों को लिखित ‘फ्री विल’ घोषणा पत्र देने शुरू कर दिया है, जिसमें वे यह प्रमाणित करते हैं कि उनका धर्म परिवर्तन या धर्म में बने रहने का निर्णय पूरी तरह से स्वेच्छा से किया गया है।

चर्च के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम संभावित कानूनी जाँच से बचाव के लिए एक सतर्कता उपाय है। हस्ताक्षरित घोषणा पत्र के माध्यम से वे यह दिखाना चाहते हैं कि किसी भी प्रकार का आर्थिक या अन्य प्रकार का दबाव नहीं लगाया गया।

कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जबकि यह कानून जबरन परिवर्तन को लक्षित करता है, स्वैच्छिक परिवर्तन के लिए दस्तावेजीकरण अनिवार्य नहीं करता। फिर भी ‘जबरन’ की परिभाषा में अस्पष्टता के कारण धार्मिक संस्थानों ने इस प्रकार की कागजी कार्रवाई को सुरक्षा उपाय के रूप में अपनाया है।

इस कदम पर प्रतिक्रियाएँ मिश्रित हैं। कुछ विश्वासी इसे पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मानते हैं, जबकि अन्य इसे वास्तविक धार्मिक अभिव्यक्ति के आसपास संदेह की हवा पैदा करने वाला मानते हैं।

धर्मपरिवर्तन विधेयक इस वर्ष के अंत में लागू होने की संभावना है, और अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि अनुपालन की निगरानी के लिए कौन से विस्तृत दिशा‑निर्देश जारी किए जाएंगे।
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