📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Photo: Bernard Gotfryd - Edited from tif by Cart
टेक्नोलॉजी
भारत ने 62,500 करोड़ रुपये का मोबाइल योजना शुरू, एप्पल को भारत में उत्पादन बढ़ाने का संकेत
✍️ ThePrint
🗓 22 अग. 2026, 11:39 AM
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सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल निर्माण योजना को मंजूरी दी और एप्पल को भारत में iPhone के अलावा अन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने की आशा जताई।
नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये के मोबाइल निर्माण योजना को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया, जिसका उद्देश्य भारत के घरेलू हैंडसेट इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है। यह योजना "मेक इन इंडिया" पहल के तहत वित्तीय प्रोत्साहन, कर रियायतें और बुनियादी ढाँचा समर्थन प्रदान करेगी, जिससे निर्माताओं को देश में उत्पादन सुविधाएँ स्थापित या विस्तारित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
इसी घोषणा में अधिकारियों ने संकेत दिया कि एप्पल, जो वर्तमान में तमिलनाडु और कर्नाटक में iPhone असेंबल करता है, को अपने भारतीय संचालन को iPad, Mac या वेयरेबल्स जैसे अन्य उत्पादों तक विस्तारित करने की उम्मीद है। यह कदम तकनीकी दिग्गज की आपूर्ति श्रृंखला को गहरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि इस योजना से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आकर्षित होगा और हजारों रोजगार सृजित होंगे। सरकार ने 2030 तक वैश्विक मोबाइल उत्पादन में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है, साथ ही प्रगति की निगरानी के लिए समय‑समय पर समीक्षा की जाएगी।
सूचना में सब्सिडी के चरणबद्ध रोल‑आउट का भी उल्लेख है, जिसमें स्थानीयकरण मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों को प्रारंभिक चरण में समर्थन मिलेगा। पात्र कंपनियों को पूँजी व्यय का 30 प्रतिशत तक समर्थन मिल सकता है, बशर्ते वे प्रदर्शन मानकों को पूरा करें।
उद्योग के हितधारकों ने इस पहल का स्वागत किया, यह कहा कि स्पष्ट नीति ढाँचा और पूर्वानुमेय प्रोत्साहन भारत में उच्च‑मूल्य वाले निर्माण को स्केल‑अप करने के लिए आवश्यक हैं।
इसी घोषणा में अधिकारियों ने संकेत दिया कि एप्पल, जो वर्तमान में तमिलनाडु और कर्नाटक में iPhone असेंबल करता है, को अपने भारतीय संचालन को iPad, Mac या वेयरेबल्स जैसे अन्य उत्पादों तक विस्तारित करने की उम्मीद है। यह कदम तकनीकी दिग्गज की आपूर्ति श्रृंखला को गहरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि इस योजना से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश आकर्षित होगा और हजारों रोजगार सृजित होंगे। सरकार ने 2030 तक वैश्विक मोबाइल उत्पादन में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा है, साथ ही प्रगति की निगरानी के लिए समय‑समय पर समीक्षा की जाएगी।
सूचना में सब्सिडी के चरणबद्ध रोल‑आउट का भी उल्लेख है, जिसमें स्थानीयकरण मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों को प्रारंभिक चरण में समर्थन मिलेगा। पात्र कंपनियों को पूँजी व्यय का 30 प्रतिशत तक समर्थन मिल सकता है, बशर्ते वे प्रदर्शन मानकों को पूरा करें।
उद्योग के हितधारकों ने इस पहल का स्वागत किया, यह कहा कि स्पष्ट नीति ढाँचा और पूर्वानुमेय प्रोत्साहन भारत में उच्च‑मूल्य वाले निर्माण को स्केल‑अप करने के लिए आवश्यक हैं।