कृषि
हजारीबाग के केरेडारी पंचायत में 'खेत बचाओ अभियान' के तहत किसानों के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम
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हजारीबाग जिले के केरेडारी पंचायत में मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष बैठक का आयोजन किया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग और भूमि संरक्षण पर प्रकाश डाला।
हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत केरेडारी पंचायत में 04 नवंबर 2026 को 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को मृदा (मिट्टी) स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और कृषि विभाग की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों और स्थानीय किसानों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया, जहाँ मिट्टी की वास्तविक आवश्यकता और फसल के प्रकार के अनुसार ही उर्वरकों का उचित मात्रा में प्रयोग करने की सलाह दी गई, ताकि अनावश्यक रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से बचा जा सके। इसके अलावा, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के संदर्भ में किसानों को मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और उत्पादकता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए जैविक खादों, हरी खाद और अन्य वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि भूमि के संरक्षण पर भी विस्तार से चर्चा की गई। खेतों की उपजाऊ शक्ति को बचाए रखने, खेती की लागत कम करने और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के संबंध में किसानों को आवश्यक तकनीकी जानकारियां प्रदान की गईं। इस अभियान का मूल उद्देश्य ग्रामीण समुदाय और अन्नदाताओं को जागरूक कर मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण करना है, ताकि खेती अधिक लाभकारी बन सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उर्वरता सुरक्षित रह सके।
इस 'खेत बचाओ अभियान' में ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर (BTM) सुभाष कुमार, असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर (AO) अनुज कुमार, एग्रीकल्चर टेक्निकल ऑफिसर (ATM) मो. जिया, ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर (BFS) अरुण कुमार पासवान, सचिव इसराइल मोहम्मद, किसान मित्र गुलाब राम, अवधेश सिंह और गोगो रजक सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया, जहाँ मिट्टी की वास्तविक आवश्यकता और फसल के प्रकार के अनुसार ही उर्वरकों का उचित मात्रा में प्रयोग करने की सलाह दी गई, ताकि अनावश्यक रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से बचा जा सके। इसके अलावा, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के संदर्भ में किसानों को मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और उत्पादकता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए जैविक खादों, हरी खाद और अन्य वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में कृषि भूमि के संरक्षण पर भी विस्तार से चर्चा की गई। खेतों की उपजाऊ शक्ति को बचाए रखने, खेती की लागत कम करने और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के संबंध में किसानों को आवश्यक तकनीकी जानकारियां प्रदान की गईं। इस अभियान का मूल उद्देश्य ग्रामीण समुदाय और अन्नदाताओं को जागरूक कर मिट्टी के स्वास्थ्य का संरक्षण करना है, ताकि खेती अधिक लाभकारी बन सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि की उर्वरता सुरक्षित रह सके।
इस 'खेत बचाओ अभियान' में ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर (BTM) सुभाष कुमार, असिस्टेंट एग्रीकल्चर ऑफिसर (AO) अनुज कुमार, एग्रीकल्चर टेक्निकल ऑफिसर (ATM) मो. जिया, ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर (BFS) अरुण कुमार पासवान, सचिव इसराइल मोहम्मद, किसान मित्र गुलाब राम, अवधेश सिंह और गोगो रजक सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे।