📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mayank.teenu
धर्म
सौंद ने कहा, गुरु रविदास की पवित्र वाणी समानता का प्रतीक
✍️ Amar Ujala · Ludhiana
🗓 14 अक्टू. 2026, 06:16 PM
👁 19
लुधियाना में बात करते हुए सौंद ने कहा कि गुरु रविदास की पवित्र वाणी समानता का प्रतीक है।
सौंद ने लुधियाना में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में कहा कि गुरु रविदास की पवित्र वाणी समानता का स्पष्ट प्रतीक है। यह बयान स्थानीय समुदाय समूहों द्वारा आयोजित सभा में दिया गया, जिससे संत के संदेश की आज भी प्रासंगिकता पर प्रकाश पड़ा।
गुरु रविदास, 15वीं सदी के एक रहस्यवादी कवि, उत्तर भारत में जाति‑धर्म की सीमाओं को पार करने वाले अपने विचारों के लिए सम्मानित हैं। उनके श्लोक बार‑बार यह कहते हैं कि सभी मनुष्यों में एक ही दिव्य सार है और सामाजिक भेदभाव को नकारते हैं।
सौंद के इस बयान से पंजाब में समावेशी मूल्यों को बढ़ावा देने की व्यापक अपील स्पष्ट होती है, जहाँ धार्मिक और सामाजिक नेता अक्सर ऐतिहासिक व्यक्तियों को एकता के संदेश के रूप में उद्धृत करते हैं। यह टिप्पणी श्रोताओं द्वारा सराही गई, जिन्होंने रविदास के शिक्षाओं की शाश्वतता को स्वीकार किया।
समारोह के अंत में गुरु रविदास को समर्पित एक भजन गाया गया, जिससे समुदाय ने संत द्वारा प्रचारित समानता के सिद्धांत को अपनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया।
गुरु रविदास, 15वीं सदी के एक रहस्यवादी कवि, उत्तर भारत में जाति‑धर्म की सीमाओं को पार करने वाले अपने विचारों के लिए सम्मानित हैं। उनके श्लोक बार‑बार यह कहते हैं कि सभी मनुष्यों में एक ही दिव्य सार है और सामाजिक भेदभाव को नकारते हैं।
सौंद के इस बयान से पंजाब में समावेशी मूल्यों को बढ़ावा देने की व्यापक अपील स्पष्ट होती है, जहाँ धार्मिक और सामाजिक नेता अक्सर ऐतिहासिक व्यक्तियों को एकता के संदेश के रूप में उद्धृत करते हैं। यह टिप्पणी श्रोताओं द्वारा सराही गई, जिन्होंने रविदास के शिक्षाओं की शाश्वतता को स्वीकार किया।
समारोह के अंत में गुरु रविदास को समर्पित एक भजन गाया गया, जिससे समुदाय ने संत द्वारा प्रचारित समानता के सिद्धांत को अपनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया।