📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Health and Family Welfare
स्वास्थ्य
डॉ. कुसुम शर्मा को जटिल एक्स्ट्रा‑पल्मोनरी टीबी शोध के लिए विमेन इन मेडिसिन अवॉर्ड से सम्मानित
✍️ Amar Ujala · Punjab
🗓 10 अक्टू. 2026, 08:46 PM
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लगभग दो दशकों से जटिल एक्स्ट्रा‑पल्मोनरी टीबी की जांच में काम करने वाली डॉ. कुसुम शर्मा को विमेन इन मेडिसिन अवॉर्ड मिला।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कुसुम शर्मा को राष्ट्रीय विमेन इन मेडिसिन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके दो दशकों से चल रहे जटिल एक्स्ट्रा‑पल्मोनरी टीबी (ईपीटीबी) की जांच में किए गए योगदान को मान्यता देता है, जहाँ फेफड़े के अलावा मस्तिष्क, आँखें, पेट और हड्डियों जैसे अंग प्रभावित होते हैं।
डॉ. शर्मा ने ईपीटीबी की पहचान के लिए नई निदान प्रक्रियाएँ विकसित कीं, जिससे पारंपरिक फेफड़े‑केन्द्रित परीक्षणों से बचने वाले मामलों का समय पर पता चल सके। उनका काम रोगियों के उपचार में देरी को कम कर, रोग की गंभीरता को घटाने में मददगार साबित हुआ है।
सहकर्मियों ने उनके अंतर‑विषयक दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें माइक्रोबायोलॉजी, इमेजिंग और क्लिनिकल विशेषज्ञता को मिलाकर जटिल निदान चुनौतियों को पार किया गया। यह सम्मान भारत के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को साकार करने में विशेष शोध के महत्व को रेखांकित करता है।
समारोह ने भारत में महिला वैज्ञानिकों की बढ़ती भूमिका को भी उजागर किया, जिससे स्वास्थ्य‑शोध में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को प्रोत्साहन मिला।
डॉ. शर्मा का यह सम्मान देश के टीबी नियंत्रण प्रयासों के साथ मेल खाता है, जहाँ फेफड़े‑केन्द्रित और एक्स्ट्रा‑पल्मोनरी दोनों रूपों के खिलाफ नवाचारपूर्ण शोध को प्राथमिकता दी जा रही है।
डॉ. शर्मा ने ईपीटीबी की पहचान के लिए नई निदान प्रक्रियाएँ विकसित कीं, जिससे पारंपरिक फेफड़े‑केन्द्रित परीक्षणों से बचने वाले मामलों का समय पर पता चल सके। उनका काम रोगियों के उपचार में देरी को कम कर, रोग की गंभीरता को घटाने में मददगार साबित हुआ है।
सहकर्मियों ने उनके अंतर‑विषयक दृष्टिकोण की सराहना की, जिसमें माइक्रोबायोलॉजी, इमेजिंग और क्लिनिकल विशेषज्ञता को मिलाकर जटिल निदान चुनौतियों को पार किया गया। यह सम्मान भारत के टीबी उन्मूलन लक्ष्य को साकार करने में विशेष शोध के महत्व को रेखांकित करता है।
समारोह ने भारत में महिला वैज्ञानिकों की बढ़ती भूमिका को भी उजागर किया, जिससे स्वास्थ्य‑शोध में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को प्रोत्साहन मिला।
डॉ. शर्मा का यह सम्मान देश के टीबी नियंत्रण प्रयासों के साथ मेल खाता है, जहाँ फेफड़े‑केन्द्रित और एक्स्ट्रा‑पल्मोनरी दोनों रूपों के खिलाफ नवाचारपूर्ण शोध को प्राथमिकता दी जा रही है।