📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
खानपान
लेखक ने दो साल में पानिपुरी वाले की कहानी लिखी
✍️ The Hindu
🗓 06 अक्टू. 2026, 07:00 AM
👁 26
दो साल में एक पत्रकार ने पानिपुरी वाले विक्रेताओं के साथ भरोसा बनाया और उनकी कहानियों को दर्ज किया, जबकि वे पहले इसे नहीं चाहते थे।
एक फीचर लेखक ने पिछले दो वर्षों में भारत के विभिन्न शहरों में पानिपुरी वाले विक्रेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित किए। शुरुआत में कई विक्रेता मीडिया के सामने अपनी निजी कहानी साझा करने में हिचकिचाते थे, पर लेखक ने उनके स्टॉल पर समय बिताकर, रोज़मर्रा की कार्यवाही को समझकर और सच्ची मित्रता दिखाकर उनका भरोसा जीत लिया।
इस श्रृंखला में इन छोटे व्यापारियों के आर्थिक दबाव, पारिवारिक संबंध और सांस्कृतिक गर्व को उजागर किया गया है, साथ ही वे नियामक चुनौतियों और मौसमी उतार‑चढ़ाव से कैसे निपटते हैं, यह भी दिखाया गया है।
लेखक का यह प्रयास अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों को आवाज़ देने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिनकी कहानियां अक्सर मुख्यधारा के मीडिया में नहीं आतीं। पानिपुरी वाले की कहानियों को दर्ज करके, यह श्रृंखला भारतीय स्ट्रीट फ़ूड संस्कृति के एक अभिन्न हिस्से को मानवीय रूप में प्रस्तुत करती है।
इस श्रृंखला में इन छोटे व्यापारियों के आर्थिक दबाव, पारिवारिक संबंध और सांस्कृतिक गर्व को उजागर किया गया है, साथ ही वे नियामक चुनौतियों और मौसमी उतार‑चढ़ाव से कैसे निपटते हैं, यह भी दिखाया गया है।
लेखक का यह प्रयास अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों को आवाज़ देने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिनकी कहानियां अक्सर मुख्यधारा के मीडिया में नहीं आतीं। पानिपुरी वाले की कहानियों को दर्ज करके, यह श्रृंखला भारतीय स्ट्रीट फ़ूड संस्कृति के एक अभिन्न हिस्से को मानवीय रूप में प्रस्तुत करती है।