📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bernard Gagnon
स्थानीय
कान्हा टाइगर रिज़र्व में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया स्थानांतरण
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 11 अक्टू. 2026, 09:36 PM
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सौ साल बाद जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिज़र्व के सूपखार में बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भागीदारी की।
मध्य प्रदेश वन विभाग ने बताया कि कान्हा टाइगर रिज़र्व के सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों का एक समूह स्थानांतरित किया गया है, जिससे इस क्षेत्र में सौ साल बाद पहली बार इनका आगमन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस स्थानांतरण की देखरेख की, जिसमें बड़े बाड़े में विशेष रूप से निर्मित आवासीय क्षेत्र में भैंसों को रखा गया है।
बाड़ा कई हेक्टेयर में फैला है और इसमें जल स्रोत, चराई के लिये घास के मैदान और सुरक्षा हेतु मजबूत बाड़ शामिल हैं, ताकि भैंसों को शिकार और मानव‑वन्यजीव टकराव से बचाया जा सके। इन भैंसों को निकटवर्ती वन क्षेत्रों से लाया गया था, जहाँ एक छोटी, अलग‑थलग जनसंख्या अभी भी जीवित थी।
संरक्षण अधिकारियों का कहना है कि इस पुनर्स्थापना का उद्देश्य रिज़र्व के पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्स्थापित करना है, क्योंकि भैंसें घास के मैदान की देखभाल और शीर्ष शिकारियों के लिये शिकार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। यह कदम राज्य के व्यापक वन्यजीव पुनरुद्धार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आवास हानि और शिकार के कारण लुप्त हुए मूल प्रजातियों को फिर से लाना है।
निगरानी टीमें जीपीएस कॉलर के माध्यम से भैंसों के स्वास्थ्य और गति को ट्रैक करेंगी, और जैसे ही ये पर्यावरण के अनुकूल हो जाएँगे, उन्हें धीरे‑धीरे बाड़े से बाहर घूमने की अनुमति दी जाएगी। इस पहल से जैव विविधता में वृद्धि और क्षेत्र में इको‑टूरिज़्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय समुदायों को इस परियोजना के बारे में सूचित किया गया है, और अधिकारियों ने सह-अस्तित्व तथा वन्यजीव पर्यटन से मिलने वाले आर्थिक लाभों पर ज़ोर दिया है।
बाड़ा कई हेक्टेयर में फैला है और इसमें जल स्रोत, चराई के लिये घास के मैदान और सुरक्षा हेतु मजबूत बाड़ शामिल हैं, ताकि भैंसों को शिकार और मानव‑वन्यजीव टकराव से बचाया जा सके। इन भैंसों को निकटवर्ती वन क्षेत्रों से लाया गया था, जहाँ एक छोटी, अलग‑थलग जनसंख्या अभी भी जीवित थी।
संरक्षण अधिकारियों का कहना है कि इस पुनर्स्थापना का उद्देश्य रिज़र्व के पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्स्थापित करना है, क्योंकि भैंसें घास के मैदान की देखभाल और शीर्ष शिकारियों के लिये शिकार के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। यह कदम राज्य के व्यापक वन्यजीव पुनरुद्धार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आवास हानि और शिकार के कारण लुप्त हुए मूल प्रजातियों को फिर से लाना है।
निगरानी टीमें जीपीएस कॉलर के माध्यम से भैंसों के स्वास्थ्य और गति को ट्रैक करेंगी, और जैसे ही ये पर्यावरण के अनुकूल हो जाएँगे, उन्हें धीरे‑धीरे बाड़े से बाहर घूमने की अनुमति दी जाएगी। इस पहल से जैव विविधता में वृद्धि और क्षेत्र में इको‑टूरिज़्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय समुदायों को इस परियोजना के बारे में सूचित किया गया है, और अधिकारियों ने सह-अस्तित्व तथा वन्यजीव पर्यटन से मिलने वाले आर्थिक लाभों पर ज़ोर दिया है।