📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / 456legend
शिक्षा
पश्चिम बंगाल का उच्च शिक्षा कानून: भारतीय विश्वविद्यालयों को नियंत्रण से स्वतंत्रता की ओर
✍️ indianexpress.com
🗓 14 सित. 2026, 06:36 PM
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पश्चिम बंगाल का नया उच्च शिक्षा कानून भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए एक मॉडल माना जा रहा है, जो राज्य नियंत्रण से अधिक शैक्षणिक स्वतंत्रता की ओर बदलाव का आग्रह करता है।
पश्चिम बंगाल ने हाल ही में एक उच्च शिक्षा कानून पारित किया है जो विश्वविद्यालयों के शासन को पुनर्परिभाषित करता है, राज्य हस्तक्षेप को कम करने और संस्थागत स्वायत्तता बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
इस विधेयक में एक नया शासन ढाँचा पेश किया गया है, जिसमें वरिष्ठ शिक्षाविदों और बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक शासकीय परिषद स्थापित की गई है। यह पाठ्यक्रम डिजाइन, शोध प्राथमिकताएँ और वित्तीय प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश भी निर्धारित करता है, जिससे विश्वविद्यालयों को अधिक लचीलापन मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में काम कर सकता है, जिससे नियंत्रण आधारित प्रणाली से शैक्षणिक स्वतंत्रता और नवाचार को प्राथमिकता देने वाली प्रणाली की ओर बदलाव को बढ़ावा मिलेगा।
यह कदम भारत में जवाबदेही और स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए बढ़ती मांगों के बीच आया है, और यह पूरे देश में उच्च शिक्षा परिदृश्य को पुनः आकार दे सकता है।
इस विधेयक में एक नया शासन ढाँचा पेश किया गया है, जिसमें वरिष्ठ शिक्षाविदों और बाहरी विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक शासकीय परिषद स्थापित की गई है। यह पाठ्यक्रम डिजाइन, शोध प्राथमिकताएँ और वित्तीय प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश भी निर्धारित करता है, जिससे विश्वविद्यालयों को अधिक लचीलापन मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक ब्लूप्रिंट के रूप में काम कर सकता है, जिससे नियंत्रण आधारित प्रणाली से शैक्षणिक स्वतंत्रता और नवाचार को प्राथमिकता देने वाली प्रणाली की ओर बदलाव को बढ़ावा मिलेगा।
यह कदम भारत में जवाबदेही और स्वायत्तता के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए बढ़ती मांगों के बीच आया है, और यह पूरे देश में उच्च शिक्षा परिदृश्य को पुनः आकार दे सकता है।