📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
बिज़नेस
पश्चिम बंगाल ने नई उद्योग नीति जारी, तकनीक व जलवायु लक्ष्य पर केंद्रित
✍️ ThePrint
🗓 07 नव. 2026, 02:10 PM
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पश्चिम बंगाल सरकार ने नई उद्योग नीति पेश की, जिसमें प्रौद्योगिकी विकास और जलवायु लचीलापन पर ज़ोर दिया गया, साथ ही भूमि अधिग्रहण और बिजली आपूर्ति की चुनौतियों को स्वीकार किया गया।
कोलकाता, 7 नवम्बर (द प्रिंट) – पश्चिम बंगाल सरकार ने नई उद्योग नीति जारी की, जिसका उद्देश्य राज्य को उन्नत प्रौद्योगिकी और जलवायु‑अनुकूल उत्पादन का केंद्र बनाना है। इस नीति में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, डिजिटल‑हार्डवेयर क्लस्टरों और हरित‑प्रौद्योगिकी स्टार्ट‑अप्स के लिए कर रियायतें, तेज़ मंजूरी प्रक्रिया और योग्य कंपनियों को सब्सिडी वाली भूमि प्रदान करने का प्रावधान है।
निवेश के रूप में अगले पाँच वर्षों में कई सौ करोड़ रुपये की संभावनाओं का अनुमान है, पर सरकार ने दो प्रमुख बाधाओं को उजागर किया: बड़े पैमाने पर कारखानों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराना और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना। इन समस्याओं को हल करने के लिए एक विशेष भूमि‑आवंटन सेल और एक‑विंडो प्रणाली के माध्यम से मंजूरी प्रक्रिया को तेज़ करने की योजना बनाई गई है।
बिजली के क्षेत्र में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाना, कैप्टिव जेनरेशन को प्रोत्साहित करना और ग्रिड को अपग्रेड करने के लिए केंद्र सरकार के साथ साझेदारी करना शामिल है। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि यह नीति राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और टियर‑2‑टियर‑3 शहरों में कुशल रोजगार सृजन करेगी।
उद्योग संगठनों ने प्रौद्योगिकी और स्थिरता पर ध्यान देने की सराहना की, पर भूमि‑उपयोग संबंधी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की, क्योंकि अनसुलझे विवाद निवेशकों को निरुत्साहित कर सकते हैं।
नीति की वार्षिक समीक्षा की जाएगी, जिसमें निवेश प्रवाह, रोजगार सृजन और उत्सर्जन में कमी के प्रदर्शन संकेतकों को राज्य मंत्रिमंडल को रिपोर्ट किया जाएगा।
निवेश के रूप में अगले पाँच वर्षों में कई सौ करोड़ रुपये की संभावनाओं का अनुमान है, पर सरकार ने दो प्रमुख बाधाओं को उजागर किया: बड़े पैमाने पर कारखानों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध कराना और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना। इन समस्याओं को हल करने के लिए एक विशेष भूमि‑आवंटन सेल और एक‑विंडो प्रणाली के माध्यम से मंजूरी प्रक्रिया को तेज़ करने की योजना बनाई गई है।
बिजली के क्षेत्र में सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाना, कैप्टिव जेनरेशन को प्रोत्साहित करना और ग्रिड को अपग्रेड करने के लिए केंद्र सरकार के साथ साझेदारी करना शामिल है। एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि यह नीति राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है और टियर‑2‑टियर‑3 शहरों में कुशल रोजगार सृजन करेगी।
उद्योग संगठनों ने प्रौद्योगिकी और स्थिरता पर ध्यान देने की सराहना की, पर भूमि‑उपयोग संबंधी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की, क्योंकि अनसुलझे विवाद निवेशकों को निरुत्साहित कर सकते हैं।
नीति की वार्षिक समीक्षा की जाएगी, जिसमें निवेश प्रवाह, रोजगार सृजन और उत्सर्जन में कमी के प्रदर्शन संकेतकों को राज्य मंत्रिमंडल को रिपोर्ट किया जाएगा।