📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Post of India
राजनीति
वेस्ट बंगाल में विपक्ष ने 16.1 लाख मतदाता समावेशन अपीलें दायर कर, ईसीआई पर सवाल
✍️ The Hindu
🗓 01 नव. 2026, 08:37 PM
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वेस्ट बंगाल के विपक्ष ने ईसीआई के कुछ मतदाताओं को शामिल करने के निर्णय के खिलाफ 16.1 लाख अपीलें दायर कीं, जिससे निर्वाचन पंजीकरण की विश्वसनीयता पर सवाल उठे।
वेस्ट बंगाल के विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग (ECI) के पास 16.10 लाख अपीलें दायर की हैं, जिनमें वे कुछ मतदाताओं के समावेशन को चुनौती दे रहे हैं। यह कदम इस चिंता के बीच आया है कि निर्वाचन सूची में त्रुटियाँ और डुप्लिकेट नाम हो सकते हैं, जिससे आगामी चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
ट्रिनामूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित पार्टियों ने यह अपीलें दायर की हैं, जिनमें वे यह तर्क देते हैं कि इन नामों को शामिल करने के निर्णय में पर्याप्त जाँच नहीं हुई। उनका मानना है कि इन मतदाताओं के समावेशन से प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्षी प्रवक्ताओं ने बयान में कहा कि ECI का यह निर्णय पर्याप्त निरीक्षण के बिना लिया गया था और आयोग को मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन डेटाबेस की स्वतंत्र जाँच का आह्वान किया।
ECI ने अभी तक इन अपीलों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि आयोग को दावों की जाँच के लिए एक विशेष समिति गठित करनी पड़ सकती है और तय करना होगा कि सूची में बदलाव किया जाए या नहीं। यह मुद्दा वेस्ट बंगाल में अगले चुनावी चक्र के दौरान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।
ट्रिनामूल कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित पार्टियों ने यह अपीलें दायर की हैं, जिनमें वे यह तर्क देते हैं कि इन नामों को शामिल करने के निर्णय में पर्याप्त जाँच नहीं हुई। उनका मानना है कि इन मतदाताओं के समावेशन से प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्षी प्रवक्ताओं ने बयान में कहा कि ECI का यह निर्णय पर्याप्त निरीक्षण के बिना लिया गया था और आयोग को मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने निर्वाचन डेटाबेस की स्वतंत्र जाँच का आह्वान किया।
ECI ने अभी तक इन अपीलों पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है। विश्लेषकों का अनुमान है कि आयोग को दावों की जाँच के लिए एक विशेष समिति गठित करनी पड़ सकती है और तय करना होगा कि सूची में बदलाव किया जाए या नहीं। यह मुद्दा वेस्ट बंगाल में अगले चुनावी चक्र के दौरान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।