📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Election Commission of India
राजनीति
पोल्स से पहले पश्चिम बंगाल सूचना आयोग के अपील कार्य में रुकावट, तीन ट्राइब्यूनल खाली
✍️ India Today
🗓 11 अक्टू. 2026, 08:16 PM
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पश्चिम बंगाल राज्य सूचना आयोग ने तीन ट्राइब्यूनल के खाली रहने के कारण अपील कार्य को रोक दिया, जो राज्य चुनाव से पहले चिंता का कारण बन रहा है।
कोलकाता, पश्चिम बंगाल – पश्चिम बंगाल राज्य सूचना आयोग (SIR) ने यह घोषणा की है कि तीन सूचना ट्राइब्यूनल के खाली रहने के कारण वह अपने अपील कार्य को रोक रहा है। इन रिक्तियों के कारण आयोग लंबित अपीलों को सुनने में असमर्थ है, जिससे जनता की सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया ठप्प हो गई है।
यह रुकावट राज्य के आगामी विधान चुनावों के समय पर आई है। विभिन्न हितधारकों ने चेतावनी दी है कि ट्राइब्यूनल के कार्य न होने से नागरिकों के सूचना अधिकार पर असर पड़ेगा, जो चुनावी पारदर्शिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों ने बताया कि वे शीघ्र ही इन पदों की नियुक्ति करने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु अभी तक कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है। यह स्थिति आयोग के अपने मिशन को चुनावों से पहले जारी रखने में प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करती है।
निर्वाचन पर्यवेक्षक और नागरिक समाज के समूहों ने ट्राइब्यूनल की कार्यक्षमता बहाल करने के लिए त्वरित कार्रवाई का आह्वान किया है, यह कहते हुए कि सूचनात्मक शासन के बिना सूचित मतदान संभव नहीं है।
आयोग के अगले कदम अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं, पर उम्मीद है कि राज्य सरकार जल्द ही इस स्टाफिंग कमी को दूर कर चुनावी प्रक्रिया के तीव्र होने से पहले इसे सुलझा लेगी।
यह रुकावट राज्य के आगामी विधान चुनावों के समय पर आई है। विभिन्न हितधारकों ने चेतावनी दी है कि ट्राइब्यूनल के कार्य न होने से नागरिकों के सूचना अधिकार पर असर पड़ेगा, जो चुनावी पारदर्शिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों ने बताया कि वे शीघ्र ही इन पदों की नियुक्ति करने का प्रयास कर रहे हैं, परंतु अभी तक कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है। यह स्थिति आयोग के अपने मिशन को चुनावों से पहले जारी रखने में प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करती है।
निर्वाचन पर्यवेक्षक और नागरिक समाज के समूहों ने ट्राइब्यूनल की कार्यक्षमता बहाल करने के लिए त्वरित कार्रवाई का आह्वान किया है, यह कहते हुए कि सूचनात्मक शासन के बिना सूचित मतदान संभव नहीं है।
आयोग के अगले कदम अभी स्पष्ट नहीं हुए हैं, पर उम्मीद है कि राज्य सरकार जल्द ही इस स्टाफिंग कमी को दूर कर चुनावी प्रक्रिया के तीव्र होने से पहले इसे सुलझा लेगी।