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24 अक्टू. 2026•
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स्थानीय

विकास की अनदेखी: मंदिरों के निर्माण के बीच श्मशान और कब्रिस्तान की दुर्दशा पर उठे सवाल

✍️ रिपोर्टर: Mithilesh Vishwakarma 🗓 24 अक्टू. 2026, 05:31 PM 👁 34
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सरकार द्वारा मंदिरों पर किए जा रहे भारी खर्च के बीच, श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों की उपेक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

वर्तमान विकास कार्यों के स्वरूप पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा हुआ है। जहाँ एक ओर सरकार द्वारा विभिन्न मंदिरों के निर्माण और उनके सौंदर्यीकरण पर व्यापक स्तर पर व्यय किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि विकास की इस प्रक्रिया में उन स्थानों को भुलाया जा रहा है, जो समाज के अंतिम समय का मार्ग प्रशस्त करते हैं। श्मशान और कब्रिस्तान वे स्थान हैं जहाँ मनुष्य अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुँचता है, अतः इनका सुव्यवस्थित होना अनिवार्य है।

विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि विकास का अर्थ केवल धार्मिक स्थलों का निर्माण ही नहीं, बल्कि उन बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन भी होना चाहिए जो अंतिम संस्कार जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक हैं। श्मशान और कब्रिस्तानों के उचित रख-रखाव की मांग अब जोर पकड़ रही है।
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