📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Harshit SR
Derivative work: Unpetitpro
राजनीति
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नीति निर्माण को केवल कार्यकारी का अधिकार घोषित किया
✍️ The Times of India
🗓 25 जुल. 2026, 11:33 PM
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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि नीति निर्माण केवल कार्यकारी के अधिकार क्षेत्र में है, जिससे शक्ति विभाजन पर बल दिया गया।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में दिए गए निर्णय में यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक नीति का निर्माण केवल कार्यकारी शाखा का अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि विधायी निकाय कानून बना सकते हैं, परंतु नीति को लागू करने का निर्णय कार्यकारी का होता है।
यह निर्णय राज्य सरकार के नीति निर्णयों को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में आया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संसद और राज्य विधानमंडल कानून बना सकते हैं, परंतु नीति का निर्माण और कार्यान्वयन कार्यकारी का कार्य है।
इस फैसले से संविधान के शक्ति विभाजन के सिद्धांत पर बल दिया गया है। यह भी संकेत मिलता है कि जब तक कोई स्पष्ट कानूनी उल्लंघन न हो, न्यायालय कार्यकारी की नीति-निर्माण प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
यह निर्णय भविष्य में उत्तराखंड में नीति निर्माण से संबंधित विवादों को सुलझाने में मार्गदर्शक सिद्ध होगा और भारत के अन्य राज्यों में समान मामलों पर भी प्रभाव डाल सकता है।
यह निर्णय राज्य सरकार के नीति निर्णयों को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में आया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संसद और राज्य विधानमंडल कानून बना सकते हैं, परंतु नीति का निर्माण और कार्यान्वयन कार्यकारी का कार्य है।
इस फैसले से संविधान के शक्ति विभाजन के सिद्धांत पर बल दिया गया है। यह भी संकेत मिलता है कि जब तक कोई स्पष्ट कानूनी उल्लंघन न हो, न्यायालय कार्यकारी की नीति-निर्माण प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
यह निर्णय भविष्य में उत्तराखंड में नीति निर्माण से संबंधित विवादों को सुलझाने में मार्गदर्शक सिद्ध होगा और भारत के अन्य राज्यों में समान मामलों पर भी प्रभाव डाल सकता है।