📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Abram samuelson
अपराध
अमेरिका में सिखों के खिलाफ नफ़रत अपराध 10 साल में 3700% बढ़े, एफबीआई ने उजागर किया आंकड़ा
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 21 अग. 2026, 08:48 AM
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एफबीआई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में अमेरिका में सिखों के खिलाफ नफ़रत अपराध 3,700% बढ़े हैं, जबकि कुल नफ़रत अपराधों में कमी आई है।
फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने अपने नवीनतम नफ़रत अपराध रिपोर्ट में बताया कि संयुक्त राज्य में सिखों के खिलाफ दर्ज किए गए नफ़रत अपराधों में पिछले दस वर्षों में 3,700% की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यह वृद्धि पिछले दशक की तुलना में कई गुना अधिक है।
इसी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुल मिलाकर नफ़रत अपराधों की संख्या में गिरावट आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिखों के खिलाफ बढ़ती प्रवृत्ति देश के समग्र रुझान से अलग है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नागरिक अधिकार संगठनों ने सिख समुदाय की सुरक्षा के लिए अधिक निगरानी और सुदृढ़ उपायों की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि यह उछाल मौजूदा पूर्वाग्रहों को दर्शाता है और लक्षित जागरूकता की आवश्यकता है।
एफबीआई के आंकड़े, जो स्थानीय एजेंसियों की रिपोर्टों से संकलित हैं, नीति निर्माताओं के लिए नफ़रत‑आधारित हिंसा को रोकने हेतु महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में काम करते हैं। अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इन निष्कर्षों को संसाधनों के आवंटन और रणनीतियों के विकास में उपयोग करें, ताकि सिख व्यक्तियों और समुदायों को बढ़ते खतरे से बचाया जा सके।
इसी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुल मिलाकर नफ़रत अपराधों की संख्या में गिरावट आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सिखों के खिलाफ बढ़ती प्रवृत्ति देश के समग्र रुझान से अलग है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नागरिक अधिकार संगठनों ने सिख समुदाय की सुरक्षा के लिए अधिक निगरानी और सुदृढ़ उपायों की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि यह उछाल मौजूदा पूर्वाग्रहों को दर्शाता है और लक्षित जागरूकता की आवश्यकता है।
एफबीआई के आंकड़े, जो स्थानीय एजेंसियों की रिपोर्टों से संकलित हैं, नीति निर्माताओं के लिए नफ़रत‑आधारित हिंसा को रोकने हेतु महत्वपूर्ण संकेतक के रूप में काम करते हैं। अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इन निष्कर्षों को संसाधनों के आवंटन और रणनीतियों के विकास में उपयोग करें, ताकि सिख व्यक्तियों और समुदायों को बढ़ते खतरे से बचाया जा सके।