📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / FrederickIIisg
विज्ञान
हैदराबाद विश्वविद्यालय की टीम ने मेडिकल इम्प्लांट्स के लिए नई मजबूत धातु विकसित की
✍️ Telangana Today
🗓 04 नव. 2026, 01:32 AM
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हैदराबाद विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने मेडिकल इम्प्लांट्स की मजबूती और टिकाऊपन बढ़ाने वाली नई धातु विकसित की है।
हैदराबाद विश्वविद्यालय की सामग्री विज्ञान टीम ने एक नई धातु मिश्रधातु तैयार की है, जो ऑर्थोपेडिक और हृदय संबंधी इम्प्लांट्स की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए बनाई गई है।
इस मिश्रधातु में टाइटेनियम के साथ ज़िरकोनियम और नियोबियम की थोड़ी मात्रा मिलाई गई है, जिससे इसकी तन्य शक्ति और जंग प्रतिरोध में पारंपरिक सामग्री की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
प्रारंभिक प्रयोगशाला परीक्षणों से पता चला है कि यह सामग्री उच्च यांत्रिक भार सहन कर सकती है और बायोकम्पैटिबिलिटी बनी रहती है, जिससे जोड़ों के प्रतिस्थापन और स्टेंट जैसे उपकरणों की आयु बढ़ सकती है।
शोधकर्ता इस वर्ष के अंत तक पशु परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहे हैं और औद्योगिक साझेदारियों के माध्यम से इस मिश्रधातु को व्यावसायिक उपयोग में लाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इस नवाचार के अपनाने से पुनः सर्जरी की आवश्यकता घट सकती है और दीर्घकालिक इम्प्लांट्स की लागत में कमी आ सकती है।
इस मिश्रधातु में टाइटेनियम के साथ ज़िरकोनियम और नियोबियम की थोड़ी मात्रा मिलाई गई है, जिससे इसकी तन्य शक्ति और जंग प्रतिरोध में पारंपरिक सामग्री की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
प्रारंभिक प्रयोगशाला परीक्षणों से पता चला है कि यह सामग्री उच्च यांत्रिक भार सहन कर सकती है और बायोकम्पैटिबिलिटी बनी रहती है, जिससे जोड़ों के प्रतिस्थापन और स्टेंट जैसे उपकरणों की आयु बढ़ सकती है।
शोधकर्ता इस वर्ष के अंत तक पशु परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहे हैं और औद्योगिक साझेदारियों के माध्यम से इस मिश्रधातु को व्यावसायिक उपयोग में लाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इस नवाचार के अपनाने से पुनः सर्जरी की आवश्यकता घट सकती है और दीर्घकालिक इम्प्लांट्स की लागत में कमी आ सकती है।