📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
उद्धव और राज ठाकरे करेंगे 4 अक्टूबर को मुंबई में मार्च
✍️ Amar Ujala · Maharashtra
🗓 01 अक्टू. 2026, 09:30 AM
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शिवसेना के उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त मार्च का एलान किया है।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, शिवसेना के दो धड़ों के प्रमुख, ने 4 अक्टूबर को मुंबई में सार्वजनिक मार्च आयोजित करने की पुष्टि की है। यह रैली पार्टी मुख्यालय से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए निर्धारित स्थल पर समाप्त होगी, जहाँ नेताओं द्वारा समर्थकों को संबोधित किया जाएगा।
यह संयुक्त मार्च 2022 के नेतृत्व विवाद के बाद विभाजित धड़ों के बीच दुर्लभ मिलन को दर्शाता है। दोनों भाई एक साथ आकर शहर व राज्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं और आगामी स्थानीय चुनावों से पहले एक समन्वित राजनीतिक मंच स्थापित करना चाहते हैं।
शहर पुलिस को सूचना दे दी गई है और नियोजित मार्ग पर भीड़ नियंत्रण के लिए तैयारियां चल रही हैं। दोनों धड़ों के मजबूत जमीनी नेटवर्क को देखते हुए बड़ी भागीदारी की उम्मीद है। सुरक्षा के तहत बैरिकेड, ट्रैफ़िक परिवर्तन और अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है।
नेताओं ने नागरिकों से शांतिपूर्ण रूप से भाग लेने का आह्वान किया है और कहा है कि मार्च का फोकस बुनियादी ढाँचा, सार्वजनिक परिवहन और रोजगार जैसे नागरिक मुद्दों पर रहेगा। यह कदम आगामी चुनावी दौर से पहले समर्थन जुटाने और शिवसेना के भीतर फटे हुए संबंधों को जोड़ने की रणनीति को दर्शाता है।
यह संयुक्त मार्च 2022 के नेतृत्व विवाद के बाद विभाजित धड़ों के बीच दुर्लभ मिलन को दर्शाता है। दोनों भाई एक साथ आकर शहर व राज्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर एकजुटता का संदेश देना चाहते हैं और आगामी स्थानीय चुनावों से पहले एक समन्वित राजनीतिक मंच स्थापित करना चाहते हैं।
शहर पुलिस को सूचना दे दी गई है और नियोजित मार्ग पर भीड़ नियंत्रण के लिए तैयारियां चल रही हैं। दोनों धड़ों के मजबूत जमीनी नेटवर्क को देखते हुए बड़ी भागीदारी की उम्मीद है। सुरक्षा के तहत बैरिकेड, ट्रैफ़िक परिवर्तन और अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है।
नेताओं ने नागरिकों से शांतिपूर्ण रूप से भाग लेने का आह्वान किया है और कहा है कि मार्च का फोकस बुनियादी ढाँचा, सार्वजनिक परिवहन और रोजगार जैसे नागरिक मुद्दों पर रहेगा। यह कदम आगामी चुनावी दौर से पहले समर्थन जुटाने और शिवसेना के भीतर फटे हुए संबंधों को जोड़ने की रणनीति को दर्शाता है।