📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hrishikesh1618
धर्म
त्रिपुरा में शुरू हुई 7‑दिन खार्ची पूजा; मुख्यमंत्री साहा ने सांस्कृतिक संरक्षण व पर्यटन को बढ़ाने का वादा किया
✍️ India Today NE
🗓 22 जुल. 2026, 09:33 PM
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त्रिपुरा में 7‑दिन खार्ची पूजा शुरू हुई, मुख्यमंत्री मनीक साहा ने इस परंपरा के संरक्षण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का वादा किया।
7‑दिन खार्ची पूजा आज त्रिपुरा में शुरू हुई, जिससे राज्य भर के मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों में श्रद्धालु एकत्र हुए। यह त्योहार त्रिपुरी लोगों के लिए एक प्रमुख धार्मिक कार्यक्रम है, जो सप्ताह भर दैनिक अनुष्ठानों और सामुदायिक सभाओं के साथ चलता है।
मुख्यमंत्री मनीक साहा ने एक बयान में कहा कि सरकार खार्ची पूजा की धरोहर को संरक्षित करने के लिए कार्य करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों पर बुनियादी ढाँचे में सुधार और त्योहार को पड़ोसी राज्यों के आगंतुकों तक पहुँचाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
धरोहर संरक्षण पर सरकार का ध्यान ऐतिहासिक मंदिरों की मरम्मत और पारंपरिक अनुष्ठानों को बनाए रखने पर केंद्रित है। साथ ही, पर्यटन विभाग त्योहार के दौरान अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विपणन अभियान चलाएगा।
अधिकारियों का अनुमान है कि इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा और त्योहार में भाग लेने वाले शिल्पकारों व छोटे व्यवसायों के लिए अवसर पैदा होंगे। राज्य के पर्यटन बोर्ड ने पहले ही स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है ताकि त्योहार की सांस्कृतिक अखंडता बनी रहे और अधिक आगंतुकों का स्वागत किया जा सके।
मुख्यमंत्री मनीक साहा ने एक बयान में कहा कि सरकार खार्ची पूजा की धरोहर को संरक्षित करने के लिए कार्य करेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों पर बुनियादी ढाँचे में सुधार और त्योहार को पड़ोसी राज्यों के आगंतुकों तक पहुँचाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
धरोहर संरक्षण पर सरकार का ध्यान ऐतिहासिक मंदिरों की मरम्मत और पारंपरिक अनुष्ठानों को बनाए रखने पर केंद्रित है। साथ ही, पर्यटन विभाग त्योहार के दौरान अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विपणन अभियान चलाएगा।
अधिकारियों का अनुमान है कि इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिलेगा और त्योहार में भाग लेने वाले शिल्पकारों व छोटे व्यवसायों के लिए अवसर पैदा होंगे। राज्य के पर्यटन बोर्ड ने पहले ही स्थानीय समुदायों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है ताकि त्योहार की सांस्कृतिक अखंडता बनी रहे और अधिक आगंतुकों का स्वागत किया जा सके।