📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
थावरचंद डामोर ने कहा, महेंद्रजीत मालवीय का पुराना वर्चस्व खत्म, कांग्रेस में लौटे
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 20 अग. 2026, 07:37 PM
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थावरचंद डामोर, एक आदिवासी नेता, ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय का पुराना वर्चस्व अब समाप्त हो गया है, क्योंकि वह कांग्रेस में लौटे हैं और अब युवा नेता आगे आएँगे।
राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में प्रमुख नेता थावरचंद डामोर ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय का वर्चस्व अब समाप्त हो गया है। यह टिप्पणी मालवीय के कांग्रेस में पुनः प्रवेश के बाद की गई, जिससे स्थानीय राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।
डामोर ने बताया कि अब नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि आदिवासी मतदाता अब उन युवा प्रतिनिधियों को चाहते हैं जो समकालीन चुनौतियों का समाधान कर सकें, जिससे मालवीय जैसे वरिष्ठ राजनेताओं का प्रभाव घट रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालवीय का कांग्रेस में लौटना इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकता है, पर डामोर का बयान दर्शाता है कि पार्टी को नई युवा आवाज़ों को शामिल करना पड़ेगा, तभी वह आदिवासी वोट बैंक को बनाए रख पाएगी।
डामोर ने यह बयान एक स्थानीय सभा में दिया, जहाँ उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आदिवासी मतदाताओं की बदलती उम्मीदों को समझने और नई पीढ़ी के नेताओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
भले ही मालवीय के कदम का पूरा प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, डामोर की टिप्पणी राजस्थान के आदिवासी राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की प्रवृत्ति को उजागर करती है।
डामोर ने बताया कि अब नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर बदलाव का संकेत है। उन्होंने कहा कि आदिवासी मतदाता अब उन युवा प्रतिनिधियों को चाहते हैं जो समकालीन चुनौतियों का समाधान कर सकें, जिससे मालवीय जैसे वरिष्ठ राजनेताओं का प्रभाव घट रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मालवीय का कांग्रेस में लौटना इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकता है, पर डामोर का बयान दर्शाता है कि पार्टी को नई युवा आवाज़ों को शामिल करना पड़ेगा, तभी वह आदिवासी वोट बैंक को बनाए रख पाएगी।
डामोर ने यह बयान एक स्थानीय सभा में दिया, जहाँ उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आदिवासी मतदाताओं की बदलती उम्मीदों को समझने और नई पीढ़ी के नेताओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
भले ही मालवीय के कदम का पूरा प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, डामोर की टिप्पणी राजस्थान के आदिवासी राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की प्रवृत्ति को उजागर करती है।