📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
स्थानीय
मुरैना में कार्तिक स्नान के दौरान डूबीं तीन नाबालिग, दो सगी बहनें शहीद
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 05 नव. 2026, 10:15 PM
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मुरैना, मध्य प्रदेश में कार्तिक स्नान के दौरान कुंवारी नदी में डूबकर तीन नाबालिग बच्चियों की मौत, दो सगी बहनें शामिल।
मध्य प्रदेश के मुरैना में कार्तिक स्नान के पावन अवसर पर कुंवारी नदी में तीन नाबालिग बच्चियों ने स्नान किया और तेज़ धारा में बहकर डूब गईं। सभी बच्चियाँ अठारह वर्ष से कम उम्र की थीं और कुछ ही मिनटों में उनका अभाव महसूस किया गया, जिससे स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की बचाव टीम को त्वरित रूप से भेजा गया। बचावकर्ता तीनों को नदी से बाहर निकालने में सफल रहे, परन्तु तुरंत चिकित्सा सहायता के बावजूद कोई भी जीवित नहीं बचा। मृतकों में दो सगी बहनें भी शामिल थीं, जिससे स्थानीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, जिसमें नदी की स्थिति और त्यौहार के दौरान सुरक्षा उपायों की जांच की जाएगी। भविष्य में धार्मिक स्नान के दौरान सावधानी बरतने की अपील की जा रही है, विशेषकर तेज़ बहाव वाली जलधाराओं में।
इस घटना ने भीड़ प्रबंधन और धार्मिक कार्यक्रमों में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर चर्चा को तेज़ कर दिया है। पीड़ित परिवारों को सूचित किया गया है और समुदाय के नेताओं द्वारा शोकसभा आयोजित की जा रही है।
यह दुखद घटना बड़े धार्मिक सम्मेलनों में सतर्कता की आवश्यकता को उजागर करती है, जहाँ भीड़ और प्राकृतिक जल स्रोत मिलकर गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की बचाव टीम को त्वरित रूप से भेजा गया। बचावकर्ता तीनों को नदी से बाहर निकालने में सफल रहे, परन्तु तुरंत चिकित्सा सहायता के बावजूद कोई भी जीवित नहीं बचा। मृतकों में दो सगी बहनें भी शामिल थीं, जिससे स्थानीय समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।
पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, जिसमें नदी की स्थिति और त्यौहार के दौरान सुरक्षा उपायों की जांच की जाएगी। भविष्य में धार्मिक स्नान के दौरान सावधानी बरतने की अपील की जा रही है, विशेषकर तेज़ बहाव वाली जलधाराओं में।
इस घटना ने भीड़ प्रबंधन और धार्मिक कार्यक्रमों में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर चर्चा को तेज़ कर दिया है। पीड़ित परिवारों को सूचित किया गया है और समुदाय के नेताओं द्वारा शोकसभा आयोजित की जा रही है।
यह दुखद घटना बड़े धार्मिक सम्मेलनों में सतर्कता की आवश्यकता को उजागर करती है, जहाँ भीड़ और प्राकृतिक जल स्रोत मिलकर गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।