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31 अक्टू. 2026•
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*“दिल्ली की धरती पर बाबा नीम करोली की अमर विरासत—जौनापुर आश्रम में आज भी जीवंत है भक्ति, सेवा और आस्था”**

*“दिल्ली की धरती पर बाबा नीम करोली की अमर विरासत—जौनापुर आश्रम में आज भी जीवंत है भक्ति, सेवा और आस्था”**

✍️ रिपोर्टर: Rajeev Kumar Sharma 🗓 11 सित. 2026, 01:17 AM 👁 143
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दिल्ली के जौनापुर में आज भी जीवंत है बाबा नीम करोली की आध्यात्मिक विरासत

नई दिल्ली। दिल्ली की भागती-दौड़ती जिंदगी और महानगर के शोर से कुछ दूरी पर जौनापुर की शांत हरियाली के बीच स्थित बाबा नीम करोली महाराज का आश्रम आज भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक शांति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
जौनापुर-मंडी रोड पर स्थित यह आश्रम बाबा नीम करोली महाराज की दिल्ली से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक विरासतों में माना जाता है। उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार महाराजजी ने वर्ष 1973 में अपनी महासमाधि से कुछ समय पहले इस आश्रम का उद्घाटन किया था।
1970 के दशक में रखी गई आध्यात्मिक नींव
बाबा नीम करोली महाराज भगवान हनुमान के अनन्य भक्त माने जाते थे। उनका संदेश सरल था—प्रेम, सेवा, भक्ति और ईश्वर का स्मरण। 11 सितंबर 1973 को बाबा ने वृंदावन में अपना शरीर छोड़ा, लेकिन उनके अनुयायियों के लिए उनकी आध्यात्मिक विरासत आज भी जीवंत है।
जौनापुर का आश्रम इसी विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा। यहां सुबह और शाम आरती की परंपरा निभाई जाती है। आश्रम अपने शांत वातावरण और सुंदर बगीचों के लिए भी जाना जाता है।
आश्रम ही नहीं, सेवा की परंपरा भी
जौनापुर आश्रम की पहचान केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आश्रम विवरण में यहां की सेवा-परंपरा, अन्नपूर्णा मंदिर, गौशाला और बच्चों के लिए भोजन जैसी गतिविधियों का भी उल्लेख मिलता है।
यही कारण है कि दक्षिण दिल्ली के जौनापुर में स्थित यह परिसर आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बाबा नीम करोली की ‘सेवा और प्रेम’ की विचारधारा का जीवंत प्रतीक माना जाता है।
इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक
बाबा के जीवनकाल के अंतिम दौर में स्थापित यह आश्रम आज पांच दशक से अधिक समय बाद भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। दिल्ली जैसे महानगर के बीच इसका शांत वातावरण इसे अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देता है।
जौनापुर का यह आश्रम इस बात का प्रतीक है कि समय बदल सकता है, शहर बदल सकता है, लेकिन सच्ची आस्था और सेवा की परंपरा पीढ़ियों तक जीवित रह सकती है।
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