📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Subhashish Panigrahi
देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा: बुजुर्गों को बच्चों द्वारा बेदखल किया जा सकता है, कोई स्वचालित सुरक्षा नहीं
✍️ Amar Ujala
🗓 20 अग. 2026, 09:53 AM
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हाल ही के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों को अपने बच्चों द्वारा अपनी संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है, क्योंकि संपत्ति के अधिकार कानून द्वारा नियंत्रित होते हैं, न कि नैतिक दायित्व से।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक ऐतिहासिक निर्णय जारी किया है जिसमें बुजुर्गों को अपने बच्चों द्वारा अपनी संपत्ति से बेदखल करने के विरुद्ध कोई स्वचालित सुरक्षा नहीं है। अदालत ने कहा कि संपत्ति के अधिकार वैधानिक कानून द्वारा नियंत्रित होते हैं और नैतिक दायित्व कानूनी प्रावधानों को ओवरराइड नहीं करते। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि परिवार कानूनी रूप से किसी बुजुर्ग को तब बेदखल कर सकते हैं जब वह परेशानी का कारण हो या संपत्ति किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवश्यक हो।
यह फैसला एक याचिका के बाद आया था जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी सुरक्षा के स्तर पर सवाल उठाया गया था। अदालत ने बुजुर्गों की संवेदनशीलता को स्वीकार किया, लेकिन यह जोर दिया कि कानून एक व्यापक सुरक्षा प्रदान नहीं करता। इसके बजाय, उसने पक्षों को सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने और आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक हस्तक्षेप का सहारा लेने का आग्रह किया।
इस निर्णय से वरिष्ठ‑देखभाल समर्थकों में चिंता बढ़ी है, जो डरते हैं कि इससे कई बुजुर्गों के पास सुरक्षित रहने की जगह नहीं रह सकती। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्थाएँ, जैसे संयुक्त स्वामित्व या ट्रस्ट, तलाशनी चाहिए ताकि वृद्ध सदस्यों के अधिकार सुरक्षित रहें।
यह फैसला एक याचिका के बाद आया था जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए कानूनी सुरक्षा के स्तर पर सवाल उठाया गया था। अदालत ने बुजुर्गों की संवेदनशीलता को स्वीकार किया, लेकिन यह जोर दिया कि कानून एक व्यापक सुरक्षा प्रदान नहीं करता। इसके बजाय, उसने पक्षों को सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने और आवश्यकता पड़ने पर न्यायिक हस्तक्षेप का सहारा लेने का आग्रह किया।
इस निर्णय से वरिष्ठ‑देखभाल समर्थकों में चिंता बढ़ी है, जो डरते हैं कि इससे कई बुजुर्गों के पास सुरक्षित रहने की जगह नहीं रह सकती। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्थाएँ, जैसे संयुक्त स्वामित्व या ट्रस्ट, तलाशनी चाहिए ताकि वृद्ध सदस्यों के अधिकार सुरक्षित रहें।