📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sujay2026
धर्म
सुप्रीम कोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के पास मांस प्रतिबंध पर रोक नहीं दी, अपीलें गुजरात हाईकोर्ट को भेजी
✍️ Live Law
🗓 06 नव. 2026, 07:02 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के सोमनाथ मंदिर के पास मांस प्रतिबंध पर रोक की याचिका खारिज कर दी और मामले को आगे सुनवाई के लिए गुजरात हाईकोर्ट को भेज दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात सरकार द्वारा सोमनाथ मंदिर के निकट मांस की बिक्री व सेवन पर लगाए गए प्रतिबंध को रोकने की याचिका को अस्वीकार कर दिया। यह याचिका व्यापारी और धार्मिक समूहों के गठबंधन ने दायर की थी, जिन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध आजीविका और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है, पर न्यायालय ने तत्काल रोक लगाने का कोई आधार नहीं पाया।
अदालत ने सभी लंबित अपीलों को गुजरात हाईकोर्ट को सौंपने का आदेश दिया, जहाँ प्रतिबंध की संवैधानिकता और प्रशासनिक वैधता पर विस्तृत सुनवाई होगी। कोर्ट ने बताया कि यह मामला सार्वजनिक व्यवस्था, सांस्कृतिक धरोहर और राज्य की अधिकारिता से जुड़ा जटिल मुद्दा है, जिसके लिए हाईकोर्ट की गहन जांच आवश्यक है।
गुजरात सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में ही मांस प्रतिबंध लागू किया था, जिसका उद्देश्य मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखना और सामुदायिक शांति सुनिश्चित करना था। जबकि व्यापारिक वर्ग में इस निर्णय की आलोचना सुनाई देती है, अधिकारी कहते हैं कि हाईकोर्ट के निर्णय तक यह प्रतिबंध लागू रहेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश भविष्य में न्यायिक समीक्षा को रोकता नहीं है; यह केवल हाईकोर्ट की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय को स्थगित करता है। इस फैसले से भारत के अन्य तीर्थस्थलों में धार्मिक भावनाओं और व्यावसायिक गतिविधियों के टकराव पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
अदालत ने सभी लंबित अपीलों को गुजरात हाईकोर्ट को सौंपने का आदेश दिया, जहाँ प्रतिबंध की संवैधानिकता और प्रशासनिक वैधता पर विस्तृत सुनवाई होगी। कोर्ट ने बताया कि यह मामला सार्वजनिक व्यवस्था, सांस्कृतिक धरोहर और राज्य की अधिकारिता से जुड़ा जटिल मुद्दा है, जिसके लिए हाईकोर्ट की गहन जांच आवश्यक है।
गुजरात सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में ही मांस प्रतिबंध लागू किया था, जिसका उद्देश्य मंदिर परिसर की पवित्रता बनाए रखना और सामुदायिक शांति सुनिश्चित करना था। जबकि व्यापारिक वर्ग में इस निर्णय की आलोचना सुनाई देती है, अधिकारी कहते हैं कि हाईकोर्ट के निर्णय तक यह प्रतिबंध लागू रहेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश भविष्य में न्यायिक समीक्षा को रोकता नहीं है; यह केवल हाईकोर्ट की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय को स्थगित करता है। इस फैसले से भारत के अन्य तीर्थस्थलों में धार्मिक भावनाओं और व्यावसायिक गतिविधियों के टकराव पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।