Religion
काशी के अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस के अवसर पर पाँच दिन का विशेष दर्शन, भक्तों की लंबी कतार
धनतेरस से शुरू होकर पाँच दिन तक अन्नपूर्णा मंदिर में विशेष दर्शन हो रहे हैं, जहाँ सुबह 5 बजे से भक्तों की लंबी कतार लगी है।
काशी, वाराणसी में अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस के दिन से पाँच दिन तक विशेष दर्शन शुरू हुए, सुबह 5 बजे से भक्तों की लंबी कतार लगी। मंदिर में भगवान शिव (भोलेनाथ) स्वयं अन्नपूर्णा के सामने नतमस्तक होते दिखते हैं, यह मान्यता है कि इस समय दर्शन करने से परिवार में समृद्धि आती है।
इस वर्ष दर्शन निर्धारित समय से एक घंटा पहले, सुबह 4 बजे विशेष पूजा‑अर्चना और श्रृंगार के बाद आरती संपन्न कर, 5 बजे कपाट खोल दिया गया। प्रशासन ने भीड़ को संभालने के लिये अलग प्रवेश‑निकास मार्ग स्थापित किए; बांस फाटक से गेट‑1 स्थित ढूंढीराज मार्ग से प्रवेश और कालिका गली से निकास किया जा रहा है। पुलिस, पीएसी, सीसीटीवी निगरानी और मेडिकल टीम तैनात हैं।
मान्यता है कि अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन करने से धन‑धन्य और यश में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने अन्नपूर्णा से वचन लिया था कि काशी आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, और अन्नपूर्णा ने यह वचन दिया। धनतेरस के दिन समुद्र मंथन के बाद धनवंतरी अमृत कलश लेकर पृथ्वी पर आए थे, इस कारण इस दिन का विशेष महत्व है।
भक्तों ने कहा कि बांस फाटक से प्रवेश कर मंदिर के द्वार पर खड़े होते ही शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिये समय‑समय पर सूचना जारी की है और सुरक्षा उपायों को कड़ा किया है।
इस वर्ष दर्शन निर्धारित समय से एक घंटा पहले, सुबह 4 बजे विशेष पूजा‑अर्चना और श्रृंगार के बाद आरती संपन्न कर, 5 बजे कपाट खोल दिया गया। प्रशासन ने भीड़ को संभालने के लिये अलग प्रवेश‑निकास मार्ग स्थापित किए; बांस फाटक से गेट‑1 स्थित ढूंढीराज मार्ग से प्रवेश और कालिका गली से निकास किया जा रहा है। पुलिस, पीएसी, सीसीटीवी निगरानी और मेडिकल टीम तैनात हैं।
मान्यता है कि अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा का दर्शन करने से धन‑धन्य और यश में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने अन्नपूर्णा से वचन लिया था कि काशी आने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, और अन्नपूर्णा ने यह वचन दिया। धनतेरस के दिन समुद्र मंथन के बाद धनवंतरी अमृत कलश लेकर पृथ्वी पर आए थे, इस कारण इस दिन का विशेष महत्व है।
भक्तों ने कहा कि बांस फाटक से प्रवेश कर मंदिर के द्वार पर खड़े होते ही शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हुआ। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिये समय‑समय पर सूचना जारी की है और सुरक्षा उपायों को कड़ा किया है।