📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bobthewild1996
शिक्षा
भोपाल में 36 जिलों के छात्र‑शिक्षक‑अभिभावक ने सरकारी स्कूल बंद करने के विरोध में प्रदर्शन
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 23 अग. 2026, 08:36 PM
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नीलम पार्क, भोपाल में हजारों छात्र, शिक्षक और अभिभावक एकत्र हुए, सरकारी स्कूल बंदी को रोकने की मांग कर रहे हैं।
भोपाल के नीलम पार्क में 36 जिलों के छात्र, शिक्षक और अभिभावकों ने शनिवार को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। यह सभा मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा कुछ सरकारी स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव के विरोध में आयोजित की गई थी।
प्रदर्शकों ने स्कूलों की क्षतिग्रस्त इमारतों की मरम्मत, पेयजल व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अतिरिक्त नियुक्तियों की मांग की। उनका तर्क है कि बंदी से वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा से हाथ धोना पड़ेगा और ड्रॉप‑आउट दर बढ़ेगी।
राज्य के अधिकारियों ने कम छात्र संख्या और बजट की कमी को स्कूल बंद करने के कारण बताया है। प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के विलय या बुनियादी ढाँचे में सुधार जैसे वैकल्पिक उपायों की ओर ध्यान देने का आग्रह किया।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, भाग लेने वाले लोगों ने हिंदी‑अंग्रेजी दोनों में नारे लगाए और पोस्टर पकड़े। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नज़र रखी, लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे यह संकेत मिला कि वे मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
शिक्षा विभाग ने इन मांगों की समीक्षा करने और प्रदर्शकों के प्रतिनिधियों से मिलने का वादा किया है, परंतु अभी तक कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है।
प्रदर्शकों ने स्कूलों की क्षतिग्रस्त इमारतों की मरम्मत, पेयजल व शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए अतिरिक्त नियुक्तियों की मांग की। उनका तर्क है कि बंदी से वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा से हाथ धोना पड़ेगा और ड्रॉप‑आउट दर बढ़ेगी।
राज्य के अधिकारियों ने कम छात्र संख्या और बजट की कमी को स्कूल बंद करने के कारण बताया है। प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के विलय या बुनियादी ढाँचे में सुधार जैसे वैकल्पिक उपायों की ओर ध्यान देने का आग्रह किया।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, भाग लेने वाले लोगों ने हिंदी‑अंग्रेजी दोनों में नारे लगाए और पोस्टर पकड़े। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नज़र रखी, लेकिन हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे यह संकेत मिला कि वे मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
शिक्षा विभाग ने इन मांगों की समीक्षा करने और प्रदर्शकों के प्रतिनिधियों से मिलने का वादा किया है, परंतु अभी तक कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है।