📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Nagesh Jayaraman from Chennai, India
मौसम
पश्चिमी मानसून ने केरल में बरसात का मौसम शुरू किया, IMD ने घोषणा
✍️ DD News
🗓 03 अक्टू. 2026, 04:39 AM
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भारत मौसम विज्ञान विभाग ने केरल में पश्चिमी मानसून के आगमन की औपचारिक घोषणा की, जिससे बरसात का मौसम शुरू हुआ।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आधिकारिक बुलेटिन जारी कर यह पुष्टि की कि दक्षिण‑पश्चिमी मानसून ने केरल में प्रवेश कर लिया है, जिससे देश के वार्षिक बरसात के मौसम की शुरुआत का संकेत मिला है। केरल आमतौर पर हर साल पहली बारिश यहाँ प्राप्त करता है, और विभाग की घोषणा से राज्य में मौसम की स्थिति में बदलाव स्पष्ट हो गया है।
IMD की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की लहर अरब सागर के ऊपर से गुजर रही है और आने वाले कुछ दिनों में केरल के अधिकांश क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह प्रणाली धीरे‑धीरे उत्तर‑पूर्व की ओर बढ़ेगी और इस सप्ताह के बाद के दिनों में पड़ोसी राज्यों को भी प्रभावित करेगी।
राज्य के अधिकारियों ने निवासियों से सतर्क रहने, मौसम चेतावनियों पर नजर रखने और विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में जल‑जमाव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से बचाव के उपाय अपनाने का अनुरोध किया है। आपातकालीन सेवाएँ किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं।
किसानों को उम्मीद है कि मानसून का समय पर आगमन धान और अन्य वर्षा‑निर्भर फसलों के लिए आवश्यक नमी प्रदान करेगा, जिससे पूर्व‑मानसून की अपेक्षाकृत सूखी अवधि के बाद कृषि को लाभ होगा।
IMD की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की लहर अरब सागर के ऊपर से गुजर रही है और आने वाले कुछ दिनों में केरल के अधिकांश क्षेत्रों में मध्यम से भारी वर्षा की संभावना है। विशेषज्ञों ने बताया कि यह प्रणाली धीरे‑धीरे उत्तर‑पूर्व की ओर बढ़ेगी और इस सप्ताह के बाद के दिनों में पड़ोसी राज्यों को भी प्रभावित करेगी।
राज्य के अधिकारियों ने निवासियों से सतर्क रहने, मौसम चेतावनियों पर नजर रखने और विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में जल‑जमाव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से बचाव के उपाय अपनाने का अनुरोध किया है। आपातकालीन सेवाएँ किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार हैं।
किसानों को उम्मीद है कि मानसून का समय पर आगमन धान और अन्य वर्षा‑निर्भर फसलों के लिए आवश्यक नमी प्रदान करेगा, जिससे पूर्व‑मानसून की अपेक्षाकृत सूखी अवधि के बाद कृषि को लाभ होगा।