📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / UnpetitproleX
कृषि
हैराणा के मंडियों में ‘स्लो पड़ी’ से पड़ी की भीड़ घटती
✍️ Hindustan Times
🗓 11 अक्टू. 2026, 10:46 AM
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हैराणा के मंडियों में धीरे‑धीरे बढ़ने वाली पड़ी की किस्म ने पड़ी के भंडारण में जमा हो रही भीड़ को कम किया है।
हैराणा के कृषि मंडियों में पड़ी के भंडार में जमा हो रही भीड़ ने व्यापारियों और किसानों दोनों के लिए लॉजिस्टिक समस्याएँ पैदा कर दी थीं, जिससे प्रसंस्करण इकाइयों तक अनाज का प्रवाह धीमा हो गया और कीमतों में अस्थिरता आई।
अब “स्लो पड़ी” नामक धीरे‑धीरे बढ़ने वाली पड़ी की किस्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे फसल की कटाई का समय विस्तारित हो जाता है। इस तरह किसान अपनी फसल को क्रमबद्ध रूप से मंडियों में भेज सकते हैं, जिससे एक साथ बड़ी मात्रा में अनाज आने से उत्पन्न भीड़ कम होती है।
बाजार प्राधिकरणों का कहना है कि धीरे‑धीरे अनाज की आपूर्ति से भंडारण सुविधाओं और लोडिंग क्षेत्रों पर दबाव घट रहा है। इससे किसानों को नकदी प्रवाह में सुधार और लंबे समय तक भंडारण से होने वाले नुकसान में कमी की उम्मीद है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो इस मॉडल को अन्य अनाज‑उत्पादक राज्यों में भी अपनाया जा सकता है, जहाँ मंडी भीड़ से वितरण में बाधा उत्पन्न होती है।
अब “स्लो पड़ी” नामक धीरे‑धीरे बढ़ने वाली पड़ी की किस्म को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे फसल की कटाई का समय विस्तारित हो जाता है। इस तरह किसान अपनी फसल को क्रमबद्ध रूप से मंडियों में भेज सकते हैं, जिससे एक साथ बड़ी मात्रा में अनाज आने से उत्पन्न भीड़ कम होती है।
बाजार प्राधिकरणों का कहना है कि धीरे‑धीरे अनाज की आपूर्ति से भंडारण सुविधाओं और लोडिंग क्षेत्रों पर दबाव घट रहा है। इससे किसानों को नकदी प्रवाह में सुधार और लंबे समय तक भंडारण से होने वाले नुकसान में कमी की उम्मीद है।
यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो इस मॉडल को अन्य अनाज‑उत्पादक राज्यों में भी अपनाया जा सकता है, जहाँ मंडी भीड़ से वितरण में बाधा उत्पन्न होती है।