📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Vijayakumar Blathur
मौसम
नेपाल में बाढ़ की चेतावनी के बीच सिक्किम ने हिमालयी नदियों की निगरानी बढ़ाई
✍️ India Today NE
🗓 30 अग. 2026, 03:02 AM
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नेपाल से बाढ़ चेतावनी मिलने के बाद सिक्किम की आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने नदियों की निगरानी को तेज किया, ताकि नीचे बसे क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सिक्किम के प्राधिकरणों ने राज्य के प्रमुख हिमालयी नदियों पर बाढ़ निगरानी को तेज करने की घोषणा की है। यह कदम नेपाल की आपदा एजेंसियों द्वारा जारी किए गए फ्लैश‑फ्लड चेतावनियों के बाद उठाया गया है, जिसमें सीमा‑पार जलस्रोतों में जलस्तर के बढ़ने का संकेत मिला था।
सिक्किम आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि तेज़ा, रांगित और दीक्चु जैसी नदियों पर अतिरिक्त जलस्तर मापने वाले स्टेशन और रीयल‑टाइम टेलीमेट्री उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। इस डेटा को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के साथ साझा किया जाएगा ताकि नीचे बसे गांवों और शहरों को शीघ्र चेतावनी दी जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि यह विस्तारित निगरानी एक रोकथामात्मक कदम है, न कि मौजूदा संकट का जवाब। उन्होंने बाढ़‑प्रवण घाटियों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, आधिकारिक सलाह का पालन करने और निकासी मार्ग साफ रखने का आग्रह किया।
सिक्किम और नेपाल के बीच इस सहयोग से जलवायु‑प्रेरित आपदाओं से निपटने में क्षेत्रीय समन्वय की आवश्यकता स्पष्ट होती है, क्योंकि दोनों देशों को अनियमित मानसून और ग्लेशियर पिघलने से बढ़ते फ्लैश‑फ्लड जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में कोई निकासी आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति स्थिर होने तक राज्य उच्च सतर्कता बनाए रखेगा।
सिक्किम आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि तेज़ा, रांगित और दीक्चु जैसी नदियों पर अतिरिक्त जलस्तर मापने वाले स्टेशन और रीयल‑टाइम टेलीमेट्री उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। इस डेटा को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के साथ साझा किया जाएगा ताकि नीचे बसे गांवों और शहरों को शीघ्र चेतावनी दी जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि यह विस्तारित निगरानी एक रोकथामात्मक कदम है, न कि मौजूदा संकट का जवाब। उन्होंने बाढ़‑प्रवण घाटियों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, आधिकारिक सलाह का पालन करने और निकासी मार्ग साफ रखने का आग्रह किया।
सिक्किम और नेपाल के बीच इस सहयोग से जलवायु‑प्रेरित आपदाओं से निपटने में क्षेत्रीय समन्वय की आवश्यकता स्पष्ट होती है, क्योंकि दोनों देशों को अनियमित मानसून और ग्लेशियर पिघलने से बढ़ते फ्लैश‑फ्लड जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में कोई निकासी आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन स्थिति स्थिर होने तक राज्य उच्च सतर्कता बनाए रखेगा।