📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sid Sharma5911
स्थानीय
जालंधर रेलवे स्टेशन के इतिहास पर लघु फिल्म का प्रदर्शन
✍️ Amar Ujala · Jalandhar
🗓 18 सित. 2026, 06:15 PM
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जालंधर रेलवे स्टेशन के ऐतिहासिक विकास को दर्शाती लघु फिल्म को स्थानीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया, जिससे क्षेत्र की रेल विरासत पर प्रकाश डाला गया।
जालंधर, पंजाब – जालंधर रेलवे स्टेशन के शताब्दी‑पुराने सफर को दर्शाती लघु फिल्म का स्थानीय सभागृह में मंगलवार को प्रदर्शन किया गया। पुरानी फ़ोटोग्राफ़, सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों के साक्षात्कार और पुराने ट्रेन चलने के दृश्यों को मिलाकर तैयार की गई यह डॉक्यूमेंट्री, स्टेशन के औपनिवेशिक काल के छोटे ठिकाने से लेकर उत्तरी भारत के व्यस्त केंद्र तक के विकास को उजागर करती है।
स्थानीय विरासत समाज के आयोजकों ने बताया कि यह फिल्म स्टेशन की क्षेत्रीय व्यापार, गतिशीलता और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान में भूमिका को रेखांकित करती है। स्कूल के छात्रों से लेकर बुजुर्गों तक के दर्शकों ने इस दुर्लभ ऐतिहासिक झलक को सराहा और पंजाब की रेल इतिहास के कई भूले‑भटके पहलुओं को उजागर किया।
प्रदर्शन के बाद एक प्रश्न‑उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व रेलवे कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे स्टेशन की सामूहिक स्मृति और भी सुदृढ़ हुई। उत्तर रेलवे ज़ोन के अधिकारियों ने इस प्रकार की पहलों के समर्थन की बात कही और भविष्य की पीढ़ियों के लिए रेलवे विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर बल दिया।
यह कार्यक्रम नि:शुल्क था और स्थानीय मीडिया ने इसे कवर किया, जिससे क्षेत्रीय ऐतिहासिक कथाओं में बढ़ती जन रुचि स्पष्ट हुई।
स्थानीय विरासत समाज के आयोजकों ने बताया कि यह फिल्म स्टेशन की क्षेत्रीय व्यापार, गतिशीलता और सांस्कृतिक आदान‑प्रदान में भूमिका को रेखांकित करती है। स्कूल के छात्रों से लेकर बुजुर्गों तक के दर्शकों ने इस दुर्लभ ऐतिहासिक झलक को सराहा और पंजाब की रेल इतिहास के कई भूले‑भटके पहलुओं को उजागर किया।
प्रदर्शन के बाद एक प्रश्न‑उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व रेलवे कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे स्टेशन की सामूहिक स्मृति और भी सुदृढ़ हुई। उत्तर रेलवे ज़ोन के अधिकारियों ने इस प्रकार की पहलों के समर्थन की बात कही और भविष्य की पीढ़ियों के लिए रेलवे विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर बल दिया।
यह कार्यक्रम नि:शुल्क था और स्थानीय मीडिया ने इसे कवर किया, जिससे क्षेत्रीय ऐतिहासिक कथाओं में बढ़ती जन रुचि स्पष्ट हुई।