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18 Sep 2026
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सेवा संकल्प अभियान: जहां पहले कीचड़ में थम जाते थे कदम, अब पक्की सड़क पर दौड़ती है जिंदगी…

✍️ Reporter: Vishwanath Pratap Singh 🗓 18 Sep 2026, 03:05 PM 👁 11
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कोरबा के दूरस्थ ग्राम पंचायत मदनपुर के आश्रित ग्राम मांझीपारा में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए गांव तक पहुंचने वाली राह लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई थी। मदनपुर से मांझीपारा तक का करीब 2.2 किलोमीटर का रास्ता कच्चा था। गर्मी में धूल और बारिश में कीचड़ इस रास्ते की पहचान बन जाता था। गांव के लोगों के लिए यह केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली कई मुश्किलों की वजह था।
बारिश शुरू होते ही इस कच्चे रास्ते पर चलना मुश्किल हो जाता था। कीचड़ में पैर धंसते थे, कपड़े खराब हो जाते थे और वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो जाता था। किसी को अस्पताल जाना हो, बच्चों को स्कूल पहुंचाना हो या जरूरी काम से शहर जाना हो, हर बार इसी रास्ते से गुजरना पड़ता था। कई बार जरूरी काम होने के बावजूद खराब रास्ते के कारण समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता था। विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों की बसाहट वाले ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी गई।

इसका सीधा लाभ मदनपुर के मांझीपारा में रहने वाले परिवारों को भी मिला।मदनपुर से मांझीपारा तक लगभग 2.2 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है। इसके लिए लगभग 129.65 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। सड़क निर्माण का कार्य 20 जनवरी 2025 को प्रारंभ हुआ और लगभग एक वर्ष में पूर्ण कर लिया गया। पक्की सड़क बनने के बाद मांझीपारा सीधे मदनपुर से जुड़ गया है और आगे मुख्य मार्ग के माध्यम से ग्रामीणों के लिए शहर तक पहुंचना भी आसान हो गया है। इस सड़क ने ग्रामीणों की केवल आवाजाही आसान नहीं की, बल्कि उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जरूरी सेवाओं तक पहुंच के नए रास्ते खोल दिए हैं।
मदनपुर निवासी युवक अरूण कुमार राठिया बताते हैं कि पहले इस रास्ते पर आना-जाना बहुत मुश्किल था। बारिश के दिनों में कीचड़ के बीच से होकर स्कूल और दूसरे जरूरी कामों के लिए जाना पड़ता था। अब पक्की सड़क बन जाने से मोटरसाइकिल, साइकिल और दूसरे वाहन आसानी से चल रहे हैं। पहले जिस दूरी को तय करने में परेशानी होती थी, अब वही रास्ता कम समय में पूरा हो जाता है। कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले आदित्य के लिए भी सड़क बनने से स्कूल की राह आसान हुई है। वह बताते हैं कि पहले रास्ते में कीचड़ होने से आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। अब पक्की सड़क बनने के बाद स्कूल जाना आसान और सुविधाजनक हो गया है।गांव की वृद्धा नीरो बाई बताती हैं कि पहले सड़क की हालत खराब होने के कारण गांव से बाहर जाना बहुत मुश्किल था। खासकर जब कोई बीमार पड़ता था, तब परिवार की चिंता और बढ़ जाती थी। अब पक्की सड़क बनने से पैदल चलना भी आसान हो गया है और वाहन भी गांव तक आसानी से पहुंच जाते हैं।

वह बताती हैं कि अब किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो तो वाहन और एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती। समय पर इलाज मिलना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। गांव तक पहुंची विकास की राह गांव के टीकाराम भी सड़क बनने के बाद आए बदलाव को महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब आने-जाने में बहुत सुविधा हो गई है। वहीं मांझीपारा निवासी लल्लूराम बताते हैं कि पहले मदनपुर से मांझीपारा तक का रास्ता तय करना मुश्किल होता था, लेकिन अब पक्की सड़क बनने के बाद दूरी आसानी से पूरी हो जाती है। मदनपुर पहुंचने के बाद मुख्य मार्ग से शहर की ओर जाना भी सरल हो गया है। पक्की सड़क ने मांझीपारा को केवल मदनपुर से नहीं जोड़ा, बल्कि ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ने का काम किया है। अब गांव में बाहर से आने वाले लोगों और वाहनों की आवाजाही भी आसान हुई है।
सरकारी योजनाओं और जरूरी सेवाओं की पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है। सड़क बनी तो बदली गांव की रफ्तार कभी बारिश में जिस रास्ते पर कुछ कदम चलना भी चुनौती था, आज उसी रास्ते पर मोटरसाइकिल और अन्य वाहन आसानी से दौड़ रहे हैं। बच्चों के स्कूल जाने की राह आसान हुई है, बुजुर्गों को आने-जाने में सहूलियत मिली है और बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने की चिंता कम हुई है। मांझीपारा की यह पक्की सड़क केवल सीमेंट और डामर से बनी सड़क नहीं है। यह दूरस्थ आदिवासी अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली राह है। इसने गांव के लोगों के लिए सुविधाओं तक पहुंच आसान की है और उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। जहां कभी बारिश के दिनों में कीचड़ रास्ता रोक देता था, आज वहीं पक्की सड़क गांव के विकास की नई राह खोल रही है। पीएम जनमन के माध्यम से मांझीपारा तक पहुंची यह सड़क विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए सुविधा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में बढ़ता हुआ एक महत्वपूर्ण कदम है।
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