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18 Sep 2026
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मंदिर के पास मिला था 17 दिन का नवजात, तीन महीने बाद मिली मां-पिता की गोद

✍️ Reporter: Anuj jain 🗓 18 Sep 2026, 03:25 PM 👁 12
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मंदिर के पास लावारिस मिला 17 दिन का नवजात, तीन महीने बाद मिला मां-पिता का स्नेह
कारा पोर्टल के जरिए हुआ दंपती का मिलान, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सौंपा गया बच्चा; कलेक्टर ने नाम रखा ‘नरेन्द्र’
मनोहरथाना जिला झालावाड़ करीब तीन महीने पहले मनोहरथाना क्षेत्र में मंदिर के पास लावारिस हालत में मिले 17 दिन के नवजात को आखिरकार उसका परिवार मिल गया। प्रशासन की देखरेख में बाल कल्याण समिति और संबंधित विभागों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवजात को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। बच्चे के मिलने से दंपती के चेहरे पर खुशी लौट आई।
जानकारी के अनुसार करीब तीन महीने पहले मंदिर के पास नवजात के लावारिस मिलने की सूचना पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे बाल कल्याण समिति के संरक्षण में लिया। इसके बाद बच्चे को झालावाड़ के राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया और करीब सात जुलाई को उसे शिशु गृह भेज दिया गया।
इस दौरान देवमाल प्रशासन एवं संबंधित संस्थाओं की देखरेख में बालक की उचित देखभाल की गई। निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित किया गया। इसके बाद केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के पोर्टल के माध्यम से दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ी और बच्चे का उसके माता-पिता से मिलान हुआ।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया। लंबे इंतजार के बाद बच्चे को अपनी गोद में पाकर माता-पिता भावुक नजर आए।
कलेक्टर ने रखा ‘नरेन्द्र’ नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर कलेक्टर ने नवजात का नाम ‘नरेन्द्र’ रखा। नया नाम और परिवार मिलने के बाद बच्चे के जीवन में नई शुरुआत हुई।
प्रशासन ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कलेक्टर राठौड़ ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और पारिवारिक वातावरण मिलना जरूरी है। उन्होंने बालक की देखभाल से लेकर दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया तक जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की।
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