Local
सिंचाई विभाग की लापरवाही: पुल तोड़कर ग्रामीणों को किया कैद, जान जोखिम में डाल बच्चे कर रहे नहर पार
मिर्जापुर जिले के जमालपुर विकास खंड में सिंचाई विभाग ने वर्षों पुराने पुल को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के तोड़ दिया, जिससे सैकड़ों ग्रामीणों का संपर्क कट गया है और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर नहर पार करने को मजबूर हैं।
मिर्जापुर जिले के जमालपुर विकास खंड क्षेत्र के राजस्व गांव सेमरा दक्षिण के लाठ मार्ग पर स्थित वर्षों पुराने पुल को सिंचाई विभाग ने जेसीबी से तोड़ दिया है। विभाग ने पुल तोड़ने से पहले कोई वैकल्पिक पुल या डायवर्जन बनाने की जहमत नहीं उठाई, जिससे सैकड़ों की आबादी का संपर्क पूरी तरह कट गया है और वे अपने ही गांव में कैद होकर रह गए हैं। विभाग की इस घोर लापरवाही के कारण ग्रामीण और स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर नहर पार करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने पुल तोड़ने में जितनी फुर्ती दिखाई, उतनी संवेदनशीलता जनता की सुविधा को लेकर नहीं दिखाई। सामान्यतः किसी सार्वजनिक मार्ग के पुल को तोड़ने से पहले एक अस्थायी पुलिया या रपटा तैयार किया जाता है, लेकिन सेमरा में अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर सीधे आवागमन ही बंद कर दिया। इस कारण न केवल ग्रामीणों को परेशानी हो रही है, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों और बीमारों को अस्पताल ले जाने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं। चार पहिया वाहन या एम्बुलेंस का गांव में प्रवेश असंभव हो गया है।
सिंचाई विभाग के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि लापरवाह अफसरों ने बिना किसी पूर्व योजना के यह कदम उठाकर जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर आवागमन के लिए कोई मजबूत वैकल्पिक रास्ता या अस्थायी पुल तैयार नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने पुल तोड़ने में जितनी फुर्ती दिखाई, उतनी संवेदनशीलता जनता की सुविधा को लेकर नहीं दिखाई। सामान्यतः किसी सार्वजनिक मार्ग के पुल को तोड़ने से पहले एक अस्थायी पुलिया या रपटा तैयार किया जाता है, लेकिन सेमरा में अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर सीधे आवागमन ही बंद कर दिया। इस कारण न केवल ग्रामीणों को परेशानी हो रही है, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों और बीमारों को अस्पताल ले जाने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं। चार पहिया वाहन या एम्बुलेंस का गांव में प्रवेश असंभव हो गया है।
सिंचाई विभाग के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि लापरवाह अफसरों ने बिना किसी पूर्व योजना के यह कदम उठाकर जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर आवागमन के लिए कोई मजबूत वैकल्पिक रास्ता या अस्थायी पुल तैयार नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा।