📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
बिज़नेस
जंग ने भारत को ₹14 ट्रिलियन का नुकसान पहुँचाया: छिपा आर्थिक बोझ
✍️ India Today
🗓 27 जुल. 2026, 03:07 PM
👁 3
भारत जंग के कारण ₹14 लाख करोड़ का छिपा आर्थिक नुकसान झेल रहा है, जो बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाता है और उत्पादकता को बाधित करता है।
भारत की बुनियादी ढांचे पर जंग का प्रभाव धीरे‑धीरे बढ़ रहा है, जिसे ₹14 लाख करोड़ के छिपे हुए आर्थिक नुकसान के रूप में मापा गया है।
पाइपलाइनों, पुलों और रेल ट्रैकों में जंग के कारण अक्सर रिसाव, संरचनात्मक विफलता और महंगे मरम्मत कार्य होते हैं। छोटी‑छोटी जंग भी रखरखाव की जटिलता बढ़ा देती है, जिससे कंपनियों को विकास योजनाओं से धन हटाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नुकसान का कुल प्रभाव राष्ट्रीय जीडीपी पर गहरा पड़ेगा, क्योंकि मरम्मत कार्य परियोजनाओं को रोकते हैं और परिवहन नेटवर्क की दक्षता घटती है। इसके अलावा, विलंब और बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागतें माल की कीमतों पर असर डालती हैं।
सर्कार ने जंग‑रोधी सामग्रियों को अपनाने और निरीक्षण प्रोटोकॉल सुधारने के लिए बहु‑वर्षीय योजना शुरू की है, परंतु विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर निवेश के बिना समस्या और बढ़ेगी। जंग को समय पर रोकना भारत के बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए अनिवार्य है।
इस मुद्दे की तात्कालिकता ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय की मांग की है, ताकि पुरानी संपत्तियों को समय पर उन्नत किया जा सके और आगे के नुकसान को रोका जा सके।
पाइपलाइनों, पुलों और रेल ट्रैकों में जंग के कारण अक्सर रिसाव, संरचनात्मक विफलता और महंगे मरम्मत कार्य होते हैं। छोटी‑छोटी जंग भी रखरखाव की जटिलता बढ़ा देती है, जिससे कंपनियों को विकास योजनाओं से धन हटाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस नुकसान का कुल प्रभाव राष्ट्रीय जीडीपी पर गहरा पड़ेगा, क्योंकि मरम्मत कार्य परियोजनाओं को रोकते हैं और परिवहन नेटवर्क की दक्षता घटती है। इसके अलावा, विलंब और बढ़ी हुई लॉजिस्टिक लागतें माल की कीमतों पर असर डालती हैं।
सर्कार ने जंग‑रोधी सामग्रियों को अपनाने और निरीक्षण प्रोटोकॉल सुधारने के लिए बहु‑वर्षीय योजना शुरू की है, परंतु विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर निवेश के बिना समस्या और बढ़ेगी। जंग को समय पर रोकना भारत के बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए अनिवार्य है।
इस मुद्दे की तात्कालिकता ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय की मांग की है, ताकि पुरानी संपत्तियों को समय पर उन्नत किया जा सके और आगे के नुकसान को रोका जा सके।