🔥 TRENDING बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बेल्ट्रॉन... રાજકોટના કુવાડવા રોડ પર ઓવરલોડ ટ્રક એક... સાબરકાંઠા જિલ્લા સ્પેશિયલ ઓપરેશન ગ્રુપ... मोहना नगर परिषद अध्यक्ष ने वार्ड 04 मे... Jharkhand Governor Emphasizes Talent I... Para-Teacher Killed After Being Trampl...
29 Sep 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
National

₹2000 से अधिक UPI भुगतान पर MDR: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI, NPCI से मांगा जवाब

✍️ Reporter: Pranav Gaur 🗓 29 Sep 2026, 07:13 PM 👁 9
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

केंद्र सरकार के ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत ने केंद्र, RBI और NPCI से जवाब मांगा है, लेकिन व्यवस्था पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

नई दिल्ली: ₹2,000 से अधिक के कुछ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) मर्चेंट भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने फिलहाल इस नई व्यवस्था पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। यह याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता द्वारा दायर की गई है, जिसमें केंद्र के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को घोषित MDR व्यवस्था को चुनौती दी गई है।

सरकार के घोषित ढांचे के अनुसार, कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर यह MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। हालांकि, हर UPI भुगतान पर यह शुल्क नहीं लगेगा। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) UPI लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, और ₹2,000 तक के सामान्य मर्चेंट UPI भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार, लगभग 96% मर्चेंट UPI लेनदेन इस व्यवस्था से अप्रभावित रहेंगे।

आवश्यक एवं कम मार्जिन वाले कुछ क्षेत्रों जैसे रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े कैपिटल मार्केट लेनदेन के लिए 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 तक, निर्धारित किया गया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस शुल्क के कानूनी आधार और इसकी प्रकृति को लेकर केंद्र से तथ्य स्पष्ट करने को कहा। केंद्र की ओर से बताया गया कि MDR सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है, बल्कि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों और सेवा प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने MDR व्यवस्था पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए घोषित कार्यक्रम के अनुसार नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है, हालांकि इसकी वैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती जारी है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आम व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किया गया UPI भुगतान इस MDR व्यवस्था के दायरे में नहीं है। यानी ₹2,000 से ज्यादा का हर UPI पेमेंट महंगा नहीं होगा, बल्कि MDR मुख्य रूप से निर्धारित श्रेणी के बड़े मर्चेंट भुगतानों पर लागू होगा।
📲Get App