📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Avrajyoti Mitra
बिज़नेस
कनॉट प्लेस में अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक की मांग, रेस्तरां पार्टनर ने हाई कोर्ट में दायर की याचिका
✍️ Amar Ujala · Delhi
🗓 16 अक्टू. 2026, 08:45 PM
👁 13
कनॉट प्लेस के एक रेस्तरां पार्टनर आयुष चोपड़ा ने अनधिकृत प्रदर्शनों पर रोक के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की, व्यापारिक नुकसान का हवाला देते हुए मुआवजे की मांग की।
इस सप्ताह की शुरुआत में, दिल्ली के कनॉट प्लेस में एक रेस्तरां के साझेदार आयुष चोपड़ा ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने व्यावसायिक केंद्र में अनधिकृत प्रदर्शन या भीड़ इकट्ठा करने की अनुमति न देने का निर्देश मांगा है।
चोपड़ा का कहना है कि बिना अनुमति के आयोजित होने वाले प्रदर्शन अक्सर फुट ट्रैफ़िक में बाधा डालते हैं, जिससे उनके रेस्तरां और आसपास के कई व्यवसायों की बिक्री में गिरावट आई है। उन्होंने इस आर्थिक नुकसान की भरपाई के रूप में मुआवजे की भी मांग की है।
कनॉट प्लेस, जो दिल्ली का प्रमुख शॉपिंग और व्यापारिक हब है, नियमित रूप से विभिन्न राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक प्रदर्शन का स्थल बनता रहा है। जबकि इन गतिविधियों को संवैधानिक अधिकार माना जाता है, व्यापारियों ने इनका आर्थिक प्रभाव लेकर चिंताएँ जताई हैं। यह याचिका प्रदर्शन के अधिकार और व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन स्थापित करने के व्यापक विमर्श में एक नया मोड़ है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अभी तक इस याचिका पर कोई फैसला नहीं सुनाया है; मामले की सुनवाई आने वाले हफ्तों में होने की संभावना है, और सिविल प्राधिकरण तथा व्यापारिक समूह इस निर्णय को बारीकी से देख रहे हैं।
चोपड़ा का कहना है कि बिना अनुमति के आयोजित होने वाले प्रदर्शन अक्सर फुट ट्रैफ़िक में बाधा डालते हैं, जिससे उनके रेस्तरां और आसपास के कई व्यवसायों की बिक्री में गिरावट आई है। उन्होंने इस आर्थिक नुकसान की भरपाई के रूप में मुआवजे की भी मांग की है।
कनॉट प्लेस, जो दिल्ली का प्रमुख शॉपिंग और व्यापारिक हब है, नियमित रूप से विभिन्न राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक प्रदर्शन का स्थल बनता रहा है। जबकि इन गतिविधियों को संवैधानिक अधिकार माना जाता है, व्यापारियों ने इनका आर्थिक प्रभाव लेकर चिंताएँ जताई हैं। यह याचिका प्रदर्शन के अधिकार और व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन स्थापित करने के व्यापक विमर्श में एक नया मोड़ है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अभी तक इस याचिका पर कोई फैसला नहीं सुनाया है; मामले की सुनवाई आने वाले हफ्तों में होने की संभावना है, और सिविल प्राधिकरण तथा व्यापारिक समूह इस निर्णय को बारीकी से देख रहे हैं।