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टेक्नोलॉजी
आरबीआई ने डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए नई सुरक्षा उपायों की घोषणा की
✍️ News On AIR
🗓 28 अग. 2026, 10:37 AM
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आरबीआई ने ऑनलाइन धोखाधड़ी कम करने के लिए नई सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए, जिससे बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं से कड़ी पहचान और निगरानी उपाय अपनाने का आग्रह किया गया है।
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए नई सुरक्षा उपायों का एक पैकेज जारी किया है, जिससे उपभोक्ताओं और व्यवसायों को ऑनलाइन लेन‑देनों में बढ़ते जोखिम से बचाया जा सके। इस निर्देश में ऑनलाइन लेन‑देनों की तेज़ी से बढ़ती संख्या को देखते हुए कड़ी सुरक्षा प्रोटोकॉल की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
मुख्य सुझावों में उच्च‑मूल्य वाले ट्रांसफ़र के लिए अनिवार्य मल्टी‑फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन, असुरक्षित चैनलों के लिए लेन‑देन सीमा को कड़ा करना, और बैंकों व भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा रीयल‑टाइम धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को लागू करना शामिल है। साथ ही, आरबीआई ने वित्तीय संस्थानों से ग्राहक जागरूकता कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने का आग्रह किया है, जिससे फ़िशिंग, स्पूफ़िंग और अन्य सामान्य स्कैम से बचाव हो सके।
इन दिशानिर्देशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, और वित्तीय वर्ष के अंत तक अनुपालन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। नियामक ने कहा कि वह समय‑समय पर ऑडिट के माध्यम से पालन की निगरानी करेगा और गैर‑अनुपालन पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। इस कदम से डिजिटल भुगतान प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा और साइबर‑अपराधियों द्वारा होने वाले वित्तीय नुकसान में कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वैश्विक स्तर पर वित्तीय क्षेत्र में कड़ी साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप है और भारत में अधिक सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य सुझावों में उच्च‑मूल्य वाले ट्रांसफ़र के लिए अनिवार्य मल्टी‑फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन, असुरक्षित चैनलों के लिए लेन‑देन सीमा को कड़ा करना, और बैंकों व भुगतान सेवा प्रदाताओं द्वारा रीयल‑टाइम धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को लागू करना शामिल है। साथ ही, आरबीआई ने वित्तीय संस्थानों से ग्राहक जागरूकता कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने का आग्रह किया है, जिससे फ़िशिंग, स्पूफ़िंग और अन्य सामान्य स्कैम से बचाव हो सके।
इन दिशानिर्देशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, और वित्तीय वर्ष के अंत तक अनुपालन की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। नियामक ने कहा कि वह समय‑समय पर ऑडिट के माध्यम से पालन की निगरानी करेगा और गैर‑अनुपालन पर दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। इस कदम से डिजिटल भुगतान प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा और साइबर‑अपराधियों द्वारा होने वाले वित्तीय नुकसान में कमी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वैश्विक स्तर पर वित्तीय क्षेत्र में कड़ी साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप है और भारत में अधिक सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।